घूम लो तुम कहीं, मिलूंगा मैं यहीं
साहित्यघूम लो तुम कहीं, मिलूंगा मैं यहीं ✍️ संजीव शाकिर /// जगत दर्शन न्यूज घूम लो तुम कहीं, मिलूंगा मैं यहीं। अद्य हो या कल म…
घूम लो तुम कहीं, मिलूंगा मैं यहीं ✍️ संजीव शाकिर /// जगत दर्शन न्यूज घूम लो तुम कहीं, मिलूंगा मैं यहीं। अद्य हो या कल म…
हिंदी लोकभाषा साहित्य समकालीन मगही कविता लेखन को नयी भाव भंगिमा प्रदान करने वाले कवि: मथुरा प्रसाद नवीन ✍️राजीव कुमा…
गीत """"""""""" रोज़ छपे अखबारों में..... ✍️ कृष्ण चतुर्…
दिव्यांग ✍️ डाॅ.कंचन मखीजा /// जगत दर्शन न्यूज चुप रह कर भी नैनों से वो बात अपनी कह जाते हैं.. जिन्हें समझते तुम दिव्य…
शब्द ✍🏻 बिजेन्द्र कुमार तिवारी (बिजेन्दर बाबू) 7250299200 /// जगत दर्शन न्यूज गढ़े मढ़े रचते लि…
🤔 सोच 💭 ✍️ डॉ ऋषिका वर्मा हमें हम जो है वो बनाती है सोच, भीड़ से अलग दिखाती है सोच। लोग तो घमंड करते है दौलत पर, …
आ गया मै अंधेरा को हराने! एक पोते इवान के लिए नानी (किरण बरेली) के द्वारा लिखा गया अनोखा, प्रेरक और हौसला वर्धक रचना! इ…
‘मुखरित मौन’ का भव्य विमोचन: डॉ. कंचन मखीजा की नव काव्य कृति ने साहित्य जगत में जगाई नई चेतना ///जगत दर्शन न्यूज रोहतक …
दशहरा एक कहानी ✍️अर्चना कोचर /// जगत दर्शन न्यूज एक था राजा अत्याचारी उसकी कुदृष्टि में थी पर नारी राम जी की सेना ने…
जगत जननी माँ जगदम्बा के 9 रूपों को नमन इस बार नवरात्रि की शुरुआत सोमवार को हो रही है। ऐसे में माता गज (हाथी) पर चढ़कर…
एक ही कोख - दो फर्क क्यों? /// जगत दर्शन न्यूज ✍️प्रीति जायसवाल, रायबरेली एक पुरुष का स्पर्म मैं भी हूँ, एक पुरुष का स…
बरसात की बात ✍️ डॉ प्रेरणा बुडाकोटी, नई दिल्ली सावन मास के आने का प्रतीक है, बरसात, गर्मी में ठंडक का एहसास है, बरसात…
स्वतंत्रता दिवस पर ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन, देशभक्ति से गूंजा साहित्यिक मंच /// जगत दर्शन न्यूज ✍️प्रेरणा बुडाकोट…
रूत सावन की ✍️किरण बरेली सावन की रिमझिम फुहारों में सपनों के संग बिखरने दो मुझे।। इस सावन रुत की फिज़ाओं में खुशगव…
🇮🇳 भारतवासी सावधान....... 🇮🇳 ✍️बिजेन्द्र कुमार तिवारी ///जगत दर्शन साहित्य भारतवासी सावधान, नेक सोच से कर पहचान …
🌧️ मन भावन सा व न 🌧️ ✍️ बिजेंद्र कुमार तिवारी (बिजेंद्र बाबू) सरस सुहावन पावन सखी, मनभावन सावन मास। रिमझिम बदरा…
साहितयाकाश में प्रेमचंद जी प्रेमचंद जयंती पर विशेष रचना ✍️ किरण बरेली रोटियों के सेंकते वक्त ज़ेहन में एक ख्याल आ ज…
पायल (कहानी) ✍️ सीमा कुमारी (सहायक शिक्षिका, केपीएस गोबरही, सारण) अं शु की जब शादी हुई थी तब उसके ससुराल में स…
🌧️ सा व न 🌧️ सावन बहार है, अपना खोया बचपन है, सोचो तो स्वर्ग है! प्रख्यात कवयित्री किरण बरेली की एक सारगर्भित रचना…
गुम हुए परिचय तमाम एक सारगर्भित रचना, शब्द तो प्रत्यक्ष है मगर गुप्त रूह को तलाशती किसी की निगाहें, अनगिनत प्रश्न और…