यूजीसी नियमों के विरोध की तैयारी, प्रशासन की सख्ती से ताजपुर में नहीं निकला मार्च
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: मांझी प्रखंड के ताजपुर बाजार में यूजीसी से जुड़े नियमों के विरोध में छात्रों द्वारा विरोध मार्च निकालने की तैयारी की जा रही थी। इसी बीच अनुमंडल प्रशासन को इसकी सूचना मिली, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए त्वरित कदम उठाए गए। अनुमंडल पदाधिकारी ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि बिना पूर्व सूचना के किसी भी प्रकार का धरना–प्रदर्शन या जुलूस निकालना नियमों के विरुद्ध है और इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।
प्रशासन को जैसे ही संभावित धरना–प्रदर्शन की भनक लगी, ताजपुर चौक पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी के कारण प्रदर्शन की तैयारी कर रहे लोग मौके से हट गए और विरोध मार्च नहीं निकल सका। स्थिति को पूरी तरह शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए पुलिस बल ने अधिकारियों के साथ गली–गली भ्रमण कर निगरानी रखी।
इस दौरान कुछ जनप्रतिनिधियों ने भी स्थिति पर प्रतिक्रिया दी। पूर्व मुखिया पति विजय सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बंद कराना उचित नहीं है, हालांकि यूजीसी के नियमों का विरोध लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर जल्द ही सुनवाई होने वाली है, जिससे स्थिति स्पष्ट होगी।
वहीं पूर्व मुखिया देवेन्द्र सिंह ने दूरभाष पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यूजीसी के नियमों का विरोध जरूरी है और इसे वह “काला कानून” मानते हैं। उन्होंने कहा कि सवर्ण जाति के साथ इस प्रकार का न्याय उचित नहीं है और इस पर पुनर्विचार होना चाहिए।
घटना के क्रम में अनुमंडल पदाधिकारी, एकमा के एसडीपीओ तथा मांझी के बीडीओ द्वारा स्वास्थ्य विभाग, पंचायत भवन सहित अन्य सरकारी संस्थानों का भी निरीक्षण किया गया। मौके पर पूर्व प्रमुख राम किशुन सिंह, पूर्व मुखिया प्रतिनिधि जयप्रकाश महतो, पूर्व बीडीसी सदस्य सरोज सिंह सहित दर्जनों लोग उपस्थित रहे।
हालांकि ताजा रिपोर्ट के मुताबिक UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है के इनका दुरुपयोग हो सकता है। केंद्र को नए सिरे से ड्राफ्ट करने के निर्देश भी दिए गए है।

