साहित्य-साधना सम्मान से सम्मानित हुए शिक्षक-साहित्यकार, जिप अध्यक्ष जयमित्रा देवी ने बढ़ाया उत्साह
सारण (बिहार): उच्च माध्यमिक विद्यालय, भैरोपुर निजामत, सदर (छपरा) में शनिवार को आयोजित एक गरिमामय समारोह में साहित्य सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं साहित्यकारों को 'साहित्य-साधना सम्मान' से सम्मानित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित माननीय जिला परिषद अध्यक्ष श्रीमती जयमित्रा देवी ने सम्मानित रचनाकारों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के प्राचार्य विकास कुमार द्वारा जिला परिषद अध्यक्ष, साहित्यकारों एवं अतिथियों का शॉल एवं पौधा भेंट कर स्वागत करने के साथ हुई। हाल ही में ISBN नंबर सहित प्रकाशित साझा काव्य संकलन 'यादें, लम्हें और कसक' के प्रकाशन को लेकर यह सम्मान समारोह आयोजित किया गया था। पुस्तक का संपादन भैरोपुर ग्राम निवासी एवं साहित्यकार शैलेंद्र कुमार ने किया है।
इस साझा संकलन में उच्च माध्यमिक विद्यालय भैरोपुर निजामत की शिक्षिका डॉ. पुनीता कुमारी, उच्च माध्यमिक विद्यालय दफ्तरपुर के शिक्षक आकाश कुमार सिंह, शिक्षक जितेंद्र कुमार, शैलेंद्र कुमार एवं आशीष कुमार सहित कई रचनाकारों की कविताएं प्रकाशित हुई हैं।
सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए जिला परिषद अध्यक्ष श्रीमती जयमित्रा देवी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके पंचायत क्षेत्र के इतने शिक्षक-शिक्षिकाएं साहित्य और कविता के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं, यह अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि ऐसे रचनात्मक प्रयास समाज और नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होते हैं। उन्होंने सभी साहित्यकारों को शुभकामनाएं देते हुए भविष्य में हर संभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया।
विद्यालय के प्राचार्य विकास कुमार ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और इसके माध्यम से सामाजिक बुराइयों को दूर करने तथा सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया जा सकता है।
संकलन के संपादक शैलेंद्र कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में तीव्र विकास की दौड़ के बीच नई पीढ़ी कहीं न कहीं दिशाहीन होती जा रही है। ऐसे समय में साहित्य बच्चों और युवाओं को सही मार्ग दिखाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक स्वयं कलम उठाकर साहित्य सृजन करते हैं, तब उसका प्रभाव और भी व्यापक एवं सकारात्मक होता है।
सम्मानित शिक्षिका एवं साहित्यकार डॉ. पुनीता कुमारी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रसिद्ध पंक्तियां उद्धृत कीं—
"कली बेच देंगे, सुमन बेच देंगे,
कलम के सिपाही अगर रुक गए तो,
वतन के सिपाही वतन बेच देंगे।"
उन्होंने कहा कि साहित्य और लेखन के क्षेत्र में कार्य करने वाले रचनाकारों को प्रोत्साहित करना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और जिला परिषद अध्यक्ष द्वारा किया गया यह सम्मान उसी दिशा में एक सराहनीय पहल है।
समारोह में प्राचार्य विकास कुमार, संपादक शैलेंद्र कुमार, डॉ. पुनीता कुमारी, जितेंद्र कुमार, आकाश कुमार, निभा कुमारी, नवीन सिंह, रितेश कुमार, पप्पू कुमार, राधा मोहन पांडे, सूर्यकांतमणि सिंह सहित अनेक शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन शैलेंद्र कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पुनीता कुमारी द्वारा प्रस्तुत किया गया।
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