PMCH में ‘प्रिंसिपल हटाओ’ विवाद गहराया- PMO और NMC तक पहुंची शिकायत, बहाली और 100 करोड़ मुआवजे की मांग
पटना, 26 जून 2026
बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच के प्रभारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को पद से हटाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस कार्रवाई को लेकर सरकार के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मामला अब राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC), प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तक पहुंच गया है।बुद्ध कॉलोनी निवासी विधिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रभाष चंद्र शर्मा ने विभिन्न संवैधानिक और सरकारी संस्थाओं को शिकायत भेजकर डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह की तत्काल बहाली, स्वास्थ्य मंत्री से सार्वजनिक माफी और 100 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि डॉ. सिंह को एक सुनियोजित साजिश के तहत पद से हटाया गया। दावा किया गया है कि उन्होंने पीएमसीएच के सुपर स्पेशियलिटी भवन में रखे महंगे चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी कथित अनियमितताओं को उजागर किया था, जिसके बाद उन्हें निशाना बनाया गया।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य मंत्री का पीएमसीएच दौरा पूर्व नियोजित रणनीति का हिस्सा था। उनका कहना है कि बिना कारण बताओ नोटिस और बिना विभागीय जांच के महज 24 घंटे के भीतर डॉ. सिंह को पद से हटाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।शिकायत में मांग की गई है कि डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को सम्मानपूर्वक पुनः पदस्थापित किया जाए, उनकी प्रतिष्ठा को हुई कथित क्षति के लिए 100 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
गौरतलब है कि 23 जून को स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार रेडियोलॉजी विभाग में नई सुविधाओं के उद्घाटन के लिए पीएमसीएच पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान प्रभारी प्राचार्य अपने कार्यालय में मौजूद नहीं मिले। फोन पर संपर्क नहीं होने पर मंत्री ने नाराजगी जताई थी, जिसके बाद विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से हटा दिया गया।इधर, डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने भी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से न्याय की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि बिना अपना पक्ष रखने का अवसर दिए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई, जिससे उनकी छवि और सम्मान को ठेस पहुंची है।हालांकि, शिकायत में लगाए गए भ्रष्टाचार, साजिश और दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई जैसे आरोप शिकायतकर्ता के दावे हैं। इन आरोपों पर राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग या स्वास्थ्य मंत्री की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

