बीमार दादी के इलाज का सपना बना प्रेरणा, गांव की पहली महिला MBBS डॉक्टर बनीं दीक्षा कुमारी
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: मांझी प्रखंड के तख्त बरवां गांव की रहने वाली दीक्षा कुमारी ने अपने परिवार और गांव का नाम रोशन करते हुए एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर गांव की पहली महिला डॉक्टर बनने का गौरव प्राप्त किया है। दीक्षा की सफलता के पीछे उनकी बीमार दादी हीरा देवी के इलाज का सपना सबसे बड़ी प्रेरणा रहा।
हरियाणा के सोनीपत और करनाल में रहकर मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने वाली दीक्षा कुमारी ने अंबाला स्थित महर्षि मार्कण्डेय विश्वविद्यालय से एमबीबीएस की शिक्षा प्राप्त की। डॉक्टर बनने के बाद उनके मन में विशेष रूप से लाचार, गरीब और बीमार वृद्धजनों के निशुल्क उपचार की इच्छा है।
पोती के डॉक्टर बनने की खबर मिलते ही दादा उमाशंकर सिंह उर्फ जवाहर सिंह की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। परिवार को यह खुशखबरी बीते अप्रैल माह में मिली थी। बेटी के डॉक्टर बनने का सपना पूरा होने पर पिता देवेन्द्र सिंह, जो अडानी ग्रुप में जीएम हैं, तथा माता अमृता सिंह ने शुक्रवार को गांव के प्रसिद्ध सुखारी नाथ मंदिर में रुद्राभिषेक का आयोजन कराया।
देवेन्द्र सिंह ने कहा कि उनकी बेटी ने परिवार का सपना साकार किया है। उन्होंने अगले वर्ष दीक्षा को एमडी की पढ़ाई कराने तथा छोटे पुत्र देवेश प्रताप को भी एमबीबीएस डॉक्टर बनाने का संकल्प दोहराया।
दीक्षा की इस उपलब्धि पर परिवार, गांव और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। रिश्ते में उनके दादा एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शिव बालक सिंह ने भी दीक्षा को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
ग्रामीणों का कहना है कि दीक्षा की सफलता क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी और यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प और मेहनत के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

