'बक्सर की पापड़ी' को GI टैग और ODOP में शामिल करने की मांग तेज, आंदोलन की चेतावनी
बक्सर (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: बक्सर की ऐतिहासिक और पारंपरिक पहचान मानी जाने वाली 'बक्सर की पापड़ी' को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग दिलाने तथा केंद्र और राज्य सरकार की 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) योजना में शामिल करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। इसी मुद्दे को लेकर विश्वामित्र सेना द्वारा एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें स्थानीय व्यापारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया तथा इस मांग के समर्थन में एकजुटता दिखाई।
प्रेस वार्ता की अध्यक्षता करते हुए विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे ने कहा कि संगठन लगातार बक्सर की सनातन संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और पारंपरिक पहचान के संरक्षण के लिए संघर्षरत है। उन्होंने कहा कि एक समय बक्सर की पापड़ी अपनी विशिष्ट गुणवत्ता और स्वाद के कारण देशभर में प्रसिद्ध थी, लेकिन समय के साथ इसकी पहचान धूमिल होती जा रही है। उन्होंने दावा किया कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी इस पारंपरिक मिठाई को पसंद करते थे।
राजकुमार चौबे ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि बक्सर की पापड़ी को GI टैग प्रदान किया जाए और इसे ODOP योजना में शामिल कर विशेष पहचान दी जाए। उनका कहना था कि यदि सरकार इस दिशा में सकारात्मक पहल नहीं करती है तो विश्वामित्र सेना जनआंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि बक्सर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि यदि बक्सर की पापड़ी का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए तो इससे जिले में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। स्थानीय मिठाई उद्योग को नई पहचान मिलेगी और जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह मिथिलांचल के मखाना समेत देश के कई पारंपरिक उत्पादों को GI टैग और विशेष पहचान मिली है, उसी तरह बक्सर की पापड़ी भी इस सम्मान की पूरी हकदार है।
प्रेस वार्ता में उपस्थित व्यापारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि बक्सर की पापड़ी को उसकी खोई हुई पहचान वापस दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। वक्ताओं ने विश्वास जताया कि यदि सरकार इस दिशा में कदम उठाती है तो बक्सर की यह पारंपरिक मिठाई राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकती है।

