बेंगलुरु के सिपानी में धूमधाम से हुआ अन्नप्राशन संस्कार में परंपरा और संस्कृति की दिखी अनोखी झलक
✍️संवाददाता वीरेश सिंह
बेंगलुरु (कर्नाटका): बेंगलुरु स्थित सिपानी बिल्स-1 में पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच छोटे बालक के अन्नप्राशन संस्कार का आयोजन बड़े ही श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास के साथ किया गया। इस मौके पर दूर-दराज क्षेत्रों में रहने के बावजूद भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के प्रति लोगों की आस्था साफ देखने को मिली। जहां एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में धीरे-धीरे पारंपरिक पूजा-पाठ की परंपराएं कम होती जा रही हैं, वहीं दक्षिण भारत के सिपानी में आयोजित इस कार्यक्रम ने संस्कृति और संस्कारों की जीवंत मिसाल पेश की।
यह अन्नप्राशन संस्कार शंकर नायडू के पोते और बी एस जानकी जीवन संध्या के पुत्र समृद्ध जे. नायडू का था। कार्यक्रम के दौरान पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। रंग-बिरंगी रंगोलियों और पारंपरिक सजावट ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया। धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत पंडित द्वारा गणेश पूजा, नवग्रह पूजा एवं हवन के साथ की गई। इसके बाद दादा-दादी, माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों ने शिशु के अच्छे स्वास्थ्य, उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु की कामना करते हुए भगवान का आशीर्वाद लिया।
पूजा-अर्चना के उपरांत नन्हे बालक को पहली बार चांदी की कटोरी में खीर, शहद और चावल का पहला निवाला खिलाया गया। इस दौरान मौजूद अतिथियों और परिजनों ने बारी-बारी से बच्चे को आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम में परिवार और मित्रों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली, जिससे आयोजन पूरी तरह पारिवारिक और सांस्कृतिक उत्सव में बदल गया।
इस अवसर पर शंकर नायडू, गीता नायडू, जगन्नाथ बाबू, अंजना देवी, जगदीश, श्यामला, रवि, ललिता, लक्ष्मीपति, श्रीदेवी, श्रीधर कविता, गोविंद, लावण्या, रमेश, स्वप्ना, गिरी, अखिला, राघवेंद्र, आलेखा, श्रीलेखा, नितिन सहित परिवार के कई सदस्य एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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