टीबी के प्रति सामाजिक भेदभाव की दीवार तोड़ रहें टीबी चैंपियंस और जीविका दीदी
• खुद टीबी से जीते, अब समाज को जगा रहे ‘टीबी चैंपियंस’
• जीविका की सशक्त नेटवर्क बन रही है संदेशवाहक
• भेदभाव मिटाने और समय पर इलाज पर दिया जा रहा विशेष जोर
• टीबी शपथ अभियान से जनभागीदारी को मिल रही नई ताकत
सारण (बिहार): जिले में टीबी उन्मूलन की दिशा में स्वास्थ्य विभाग के द्वारा सशक्त और कारगर प्रयास किया जा रहा है। यहां टीबी से जंग जीत चुके लोग अब टीबी चैंपियंस बनकर समाज को जागरूक कर रहे हैं। केएचपीटी (KHPT) संस्था के सहयोग और जीविका समूहों के मजबूत नेटवर्क के जरिए यह अभियान न सिर्फ लोगों को बीमारी के प्रति सचेत कर रहा है, बल्कि सामाजिक भेदभाव की दीवार भी तोड़ रहा है। केएचपीटी के सहयोग से तैयार किए गए टीबी चैंपियंस, जीविका के स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के साथ मिलकर गांव-गांव में जागरूकता की अलख जगा रहे हैं। इन टीबी चैंपियंस में वे लोग भी शामिल हैं, जो खुद टीबी को हराकर स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। अब ये लोग अपने अनुभवों के जरिए समाज को प्रेरित कर रहे हैं।
बीमारी से जंग जीतकर बने योद्धा, अब गांव-गांव जगा रहे अलख
टीबी चैंपियंस द्वारा जीविका समूहों की नियमित बैठकों में भाग लेकर लोगों को टीबी के लक्षणों जैसे लगातार खांसी, बुखार, वजन घटने के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। साथ ही, समय पर जांच कराने, सरकार द्वारा उपलब्ध नि:शुल्क इलाज का लाभ उठाने और दवा का पूरा कोर्स करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
टीबी शपथ अभियान से जागरूकता का संदेश
इस अभियान की एक अहम कड़ी “टीबी शपथ अभियान” है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और परिवार शामिल होकर टीबी के खिलाफ जागरूकता फैलाने और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने की शपथ ले रहे हैं। इस पहल ने टीबी के खिलाफ लड़ाई को एक जन आंदोलन का रूप देना शुरू कर दिया है।
सामाजिक भेदभाव (स्टिग्मा) को खत्म करने की दिशा में भी यह अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। टीबी चैंपियंस लोगों को यह समझा रहे हैं कि टीबी एक इलाज योग्य बीमारी है और इससे पीड़ित लोगों के साथ भेदभाव करना गलत है। इससे मरीजों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे बिना झिझक इलाज के लिए आगे आ रहे हैं।
अब तक 31 जीविका समूहों को किया गया है जागरूक
टीबी डीपीसी हिमांशु शेखर ने बताया कि जिले में अब तक 31 जीविका समूहों को टीबी जागरूकता के लिए संवेदनशील किया जा चुका है, जिनमें करीब 670 सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी निभाई है। इन सभी सदस्यों ने टीबी प्रतिज्ञा लेकर समाज में जागरूकता फैलाने, बीमारी से जुड़े कलंक को कम करने और टीबी मरीजों के समर्थन का संकल्प लिया है। उन्होंने आगे बताया कि आने वाले महीनों में इस अभियान का दायरा और बढ़ाया जाएगा, जिसके तहत परसा, मकेर और सदर प्रखंड के सभी जीविका सदस्यों को शामिल करने की योजना है। अनुमान है कि परसा में करीब 15,120, मकेर में 7,500 तथा सदर प्रखंड में भी बड़ी संख्या में महिलाओं को इस जागरूकता अभियान से जोड़ा जाएगा, जिससे टीबी उन्मूलन की दिशा में सामुदायिक भागीदारी और मजबूत होगी।
जीविका की सशक्त नेटवर्क बन रही है संदेशवाहक
जीविका के सशक्त नेटवर्क की बदौलत यह पहल दूर-दराज और वंचित इलाकों तक भी प्रभावी रूप से पहुंच रही है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी अक्सर सीमित होती है। इससे टीबी मरीजों की पहचान तेजी से हो रही है और उन्हें समय पर उपचार मिल पा रहा है।
समुदाय आधारित प्रयास टीबी उन्मूलन में बेहद कारगर
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि समुदाय आधारित ऐसे प्रयास टीबी उन्मूलन में बेहद कारगर साबित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि टीबी चैंपियंस और जीविका के बीच तालमेल से मरीजों की शीघ्र पहचान, नियमित इलाज और पूर्ण स्वस्थ होने की दर में सुधार हो रहा है। सारण जिले में टीबी चैंपियंस, केएचपीटी और जीविका का यह समन्वय एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभर रहा है। यह न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश के लिए टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक मजबूत उदाहरण पेश कर रहा है।
गांव को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प :
जीविका समूह से जुड़ी रेखा देवी ने कहा कि हम लोग अपने समूह की बैठकों में हर महिला को टीबी के लक्षण, जांच और इलाज के बारे में जानकारी दे रहे हैं। पहले लोग डरते थे और छिपाते थे, लेकिन अब खुलकर सामने आ रहे हैं। हम सब मिलकर यह संकल्प लिए हैं कि अपने गांव को टीबी मुक्त बनाना है और किसी भी मरीज के साथ भेदभाव नहीं होने देंगे।
कोई भी मरीज डर या शर्म की वजह से इलाज से दूर न रहे
टीबी चैंपियन समीक्षा कुमारी ने कहा कि मैं खुद टीबी से पीड़ित थी, लेकिन समय पर इलाज और पूरा दवा कोर्स करने से आज पूरी तरह स्वस्थ हूं। अब मेरा उद्देश्य है कि कोई भी मरीज डर या शर्म की वजह से इलाज से दूर न रहे। टीबी पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है, बस सही समय पर जांच और इलाज जरूरी है।

