सेटेलाइट टाउन योजनाओं पर किसानों की चिंता: हितों की सुरक्षा को लेकर यूनियन की बड़ी मांग
पटना/नोएडा/नई दिल्ली: बिहार की आर्थिक चुनौतियों और प्रस्तावित सेटेलाइट टाउन योजनाओं को लेकर किसानों की चिंता अब खुलकर सामने आने लगी है। भारतीय हलधर किसान यूनियन ने राज्य सरकार से मांग की है कि विकास योजनाओं के साथ-साथ किसानों, भूमिधारकों और ग्रामीण परिवारों के हितों की हर हाल में रक्षा सुनिश्चित की जाए। यूनियन का कहना है कि यदि बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की योजनाएं लागू की जाती हैं, तो प्रभावित किसानों को समयबद्ध मुआवजा, पारदर्शी प्रक्रिया और सम्मानजनक पुनर्वास मिलना अनिवार्य होना चाहिए।
यूनियन ने यह भी कहा कि बिहार के किसान पहले से ही सिंचाई, बढ़ती लागत, फसल के उचित मूल्य, रोजगार और ग्रामीण आधारभूत संरचना जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में नई विकास योजनाओं के कारण उनकी आजीविका और भूमि अधिकार प्रभावित न हों, इसके लिए सरकार को स्पष्ट और मजबूत नीति बनानी होगी। किसानों के हितों की अनदेखी कर कोई भी विकास योजना सफल नहीं हो सकती।
भारतीय हलधर किसान यूनियन ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं, जिनमें बाजार दर पर उचित और समयबद्ध मुआवजा, प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास और वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था, स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार, ग्राम सभाओं और जनप्रतिनिधियों से पूर्व परामर्श तथा योजनाओं में पूर्ण पारदर्शिता शामिल है। यूनियन का मानना है कि विकास का रास्ता किसानों को कमजोर करके नहीं, बल्कि उन्हें सहभागी बनाकर ही संभव है।
यूनियन के राष्ट्रीय कोर कमेटी उपाध्यक्ष एवं मुख्य प्रवक्ता डॉ. शैलेश कुमार गिरि ने स्पष्ट कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसान हितों से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार में बनने वाली हर योजना में किसान सम्मान, उचित मुआवजा और भविष्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने किसानों, खेत मजदूरों और ग्रामीण युवाओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और संगठित होने की अपील की।

