सारण में ‘ज्ञान भारतम’ मिशन शुरू: प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण को लेकर प्रशासन की अपील
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: सारण जिला प्रशासन ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘ज्ञान भारतम’ के तहत जिले की सांस्कृतिक एवं बौद्धिक धरोहर को सहेजने के लिए प्राचीन पांडुलिपियों के संकलन और डिजिटलीकरण का विशेष अभियान शुरू किया है। जिला पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने जिले के नागरिकों, धार्मिक संस्थाओं और प्रबुद्ध वर्ग से इस मिशन में सक्रिय सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
जिला प्रशासन के अनुसार ‘ज्ञान भारतम’ मिशन का उद्देश्य देशभर में बिखरी प्राचीन पांडुलिपियों को आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से संरक्षित करना है। ताड़ के पत्तों, भोजपत्र, कपड़े या पुराने कागजों पर लिखी ये पांडुलिपियाँ भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्य, आयुर्वेद, खगोल विज्ञान और क्षेत्रीय इतिहास का अमूल्य स्रोत हैं, जो समय के साथ नष्ट होने के कगार पर हैं।
इस अभियान के तहत सारण में पांडुलिपियों की खोज और संरक्षण के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाई गई है। प्रशासन द्वारा पुराने पुस्तकालयों, संग्रहालयों, धार्मिक स्थलों जैसे सोनपुर स्थित हरिहरनाथ मंदिर और आमी मंदिर, ऐतिहासिक घरानों के अभिलेखागार, शैक्षणिक संस्थानों तथा स्थानीय समुदायों के सहयोग से इन दस्तावेजों को चिन्हित करने का कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्राचीन धरोहरों की जानकारी जुटाई जा रही है।
जिला पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियाँ इस मिशन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पांडुलिपियों का स्वामित्व उनके मूल मालिकों के पास ही रहेगा, जबकि प्रशासन केवल वैज्ञानिक तरीके से उनका डिजिटलीकरण कर ‘राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी’ में सुरक्षित करेगा। इस अभियान में योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को सार्वजनिक रूप से सम्मानित भी किया जाएगा।
अभियान के तहत जिला पदाधिकारी ने चिरांद में स्वर्गीय ज्योतिष आचार्य की हस्तलिखित रचनाओं का अवलोकन कर उनके परिजनों का आभार जताया। वहीं उपविकास आयुक्त लक्ष्मण तिवारी ने भोजपुरी के महान लोकनायक स्वर्गीय भिखारी ठाकुर के पैतृक गांव कुतुबपुर दियारा पहुंचकर उनके हस्तलिखित दस्तावेजों का अवलोकन किया और संरक्षण के प्रयासों की सराहना की।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास या उनके संज्ञान में कोई प्राचीन पांडुलिपि हो, तो वे संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी या जिला जनसंपर्क पदाधिकारी से संपर्क कर इस मिशन का हिस्सा बनें।
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