कृषक किस्म संरक्षण पर कार्यशाला, किसानों को मिला वैज्ञानिक मार्गदर्शन
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: सारण जिले के माँझी प्रखण्ड के कोरू-धोरू पंचायत अंतर्गत मझनपुरा गांव में सोमवार को कृषक किस्मों के संरक्षण एवं मूल्य संवर्धन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के किसानों को पारंपरिक फसलों की अनूठी किस्मों के संरक्षण और उनके वैज्ञानिक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई। यह कार्यक्रम केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ एवं बिहार राज्य जैव विविधता परिषद, पटना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न प्रखंडों से आए किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि जिन किसानों के पास बीजू आम, अमरूद, जामुन, बेल, आंवला, करोंदा, कटहल, कैथा, केला जैसी फसलों की विशिष्ट एवं पारंपरिक किस्में हैं, वे इसकी जानकारी संस्थान को अवश्य दें, ताकि इन किस्मों को पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली के माध्यम से विधिवत पंजीकृत कर संरक्षित किया जा सके। उन्होंने संस्थान द्वारा बिहार में संचालित दो महत्वपूर्ण शोध परियोजनाओं की जानकारी देते हुए जैव विविधता संरक्षण के महत्व पर बल दिया।
इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र माँझी के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. संजय कुमार राय ने कृषक किस्मों के महत्व को रेखांकित करते हुए किसानों से अपील की कि वे अपनी पारंपरिक फसल विविधताओं की जानकारी साझा करें और उनके पंजीकरण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने वैशाली जिले के गोरौल स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के अंतर्गत चल रहे केला अनुसंधान के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी, जिससे किसानों को उन्नत तकनीक अपनाने की प्रेरणा मिली।
कार्यक्रम में बिहार राज्य जैव विविधता परिषद, पटना के संयुक्त निदेशक डॉ. हेमकांत राय ने विरासत वृक्षों के संरक्षण, जैव विविधता प्रबंधन समिति की भूमिका एवं इसके माध्यम से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से दीघा आम की किस्म के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया और किसानों को इसके प्रति जागरूक किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केन्द्र माँझी के उद्यान विशेषज्ञ डॉ. जितेन्द्र चंदोला की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस दौरान घोरहट पंचायत के मुखिया शैलेंद्र मिश्रा, बरेजा पंचायत के मुखिया राजेश पांडेय, मझनपुरा की मुखिया बीना देवी सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। साथ ही सारण जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए लगभग 60 से 65 किसानों ने इस कार्यशाला में भाग लिया, जिनमें नगरा प्रखंड के अफौर गांव के नर्मदेश्वर गिरी, जनता बाजार के धमसर गांव के शैलेश पांडे तथा सिवान जिले के बसंतपुर क्षेत्र के अशोक सिंह प्रमुख रूप से शामिल रहे।
कार्यक्रम में इसुआपुर के कृषि समन्वयक नीरज गुप्ता ने अपने द्वारा विकसित लाल केला की किस्म ‘माधुरी गोल्ड’ की विशेषताओं की जानकारी साझा की, जिसे किसानों ने काफी सराहा। वहीं केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के वरिष्ठ शोध सहायक डॉ. कुलदीप ने भी किसानों के साथ संवाद कर उनके सवालों का समाधान किया और उन्हें उन्नत खेती के लिए प्रेरित किया।
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