ममता हुई शर्मसार: तपती दोपहरी में नवजात को लावारिस छोड़ गई कलियुगी माँ
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: जिस माँ की ममता को दुनिया में सबसे पवित्र माना जाता है, उसी ममता को झकझोर देने वाली एक बेहद मार्मिक और दर्दनाक घटना मांझी के रामघाट से सामने आई है। नौ महीने तक अपनी कोख में पालने वाली माँ ने ही अपने कलेजे के टुकड़े को जन्म के तुरंत बाद तपती दोपहरी में यूं लावारिस छोड़ दिया, मानो वह कोई निर्जीव वस्तु हो। यह दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं और दिल सिहर उठा।
मांझी के प्रसिद्ध रामघाट स्थित हनुमान गढ़ी मंदिर परिसर के शौचालय के पास कपड़े में लिपटी एक नन्ही सी बच्ची जिंदगी और मौत के बीच जूझती मिली। मासूम की हल्की सी हरकत ने राहगीरों का ध्यान खींचा, तो लोग दौड़ पड़े। कपड़े के भीतर एक नवजात को देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया। किसी ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, तो किसी ने उस मासूम को बचाने के लिए दुआएं मांगीं।
सूचना मिलते ही डायल 112 की पुलिस मौके पर पहुंची और उस नन्ही जान को अपनी गोद में उठाकर मांझी सीएचसी पहुंचाया। डॉक्टरों ने जब बच्ची का इलाज शुरू किया तो पता चला कि उसका वजन महज 880 ग्राम है, जो उसकी बेहद नाजुक हालत को बयां कर रहा था। हालात गंभीर देख चिकित्सकों ने उसे बेहतर इलाज के लिए छपरा सदर अस्पताल रेफर कर दिया, जहां उसकी जिंदगी बचाने की हर संभव कोशिश की जा रही है।
घटना के बाद पूरे इलाके में मातृत्व पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि आखिर कैसी मजबूरी या निर्दयता रही होगी, जिसने एक माँ को अपने ही जिगर के टुकड़े को इस तरह बेसहारा छोड़ने पर मजबूर कर दिया। वहीं, पुलिस मामले की जांच में जुट गई है, ताकि इस मासूम के साथ हुए इस अमानवीय कृत्य के जिम्मेदार तक पहुंचा जा सके।

