जलवायु परिवर्तन से निपटने की पहल: किसानों को दी गई आधुनिक खेती की ट्रेनिंग
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: जलवायु परिवर्तन के दौर में खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, माँझी द्वारा गरखा प्रखंड के मरीचा गाँव में सोमवार को एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण का मुख्य फोकस किसानों को जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों से जोड़ना और उन्हें बदलते मौसम के अनुरूप खेती के लिए तैयार करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान उद्यान विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र चंदोला ने किसानों को जलवायु अनुकूल कृषि के महत्व और उसके लाभों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने गरमा सब्जियों जैसे भिंडी, करेला, लौकी और खीरा की उन्नत खेती, ढेंचा को हरे खाद के रूप में उपयोग, मूंग की सीधी बुवाई तथा उच्च क्यारी विधि से मक्का की खेती के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी। साथ ही आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग और उससे होने वाले फायदे पर भी प्रकाश डाला गया, जिससे किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें।
वहीं पादप रोग विशेषज्ञ डॉ. जीर विनायक ने फसलों में लगने वाले कीट एवं रोगों के प्रभावी प्रबंधन की जानकारी देते हुए किसानों को समय पर बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी। प्रशिक्षण के दौरान किसानों के बीच गरमा सब्जियों, ढेंचा और मक्का के बीज भी प्रत्यक्षण के लिए वितरित किए गए, ताकि वे इन तकनीकों को अपने खेतों में अपनाकर बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकें।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में राकेश सिंह, राजीव सिंह, पशुपति सिंह, सुदेशी मांझी, मनोहर पांडेय, चंद्रदेव सिंह, राजकिशोर शाह, उमेश्वर शाह, प्रमोद सिंह, गुलशन सिंह, बद्री महतो, अर्जुन सिंह, शैलेश सिंह, अमरनाथ राय, भूपेंद्र कुमार यादव, पंकज राय, प्रभावती देवी, सिया कुंवर, विमला कुंवर सहित कुल 40 किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए नई तकनीकों को अपनाने की प्रतिबद्धता जताई।
कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केंद्र, माँझी के तकनीकी सहायक मनोज कुमार एवं कृषि विभाग, बिहार सरकार के किसान सलाहकार लालबाबू महतो, लालबाबू कुमार और जितेंद्र कुमार सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

