स्वदेशी ज्ञान और वैश्विक दृष्टि पर मंथन, ICSSR संगोष्ठी का सफल समापन
गोरखपुर (उत्तर प्रदेश): दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग द्वारा आयोजित आईसीएसएसआर (ICSSR) प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सफलता पूर्वक संपन्न हो गई। “परंपरा, संचरण और परिवर्तन: वैश्विक दुनिया में दक्षिण एशिया की वाचिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियाँ” विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में देशभर के विद्वानों ने भाग लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए।
संगोष्ठी का उद्घाटन विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन द्वारा संरक्षक एवं अध्यक्ष के रूप में किया गया। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल स्थित हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नंदिनी साहू ने विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लेते हुए उद्घाटन सत्र में अपना विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने स्वदेशी ज्ञान परंपराओं के महत्व और उनके वैश्विक संदर्भों पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर पद्मश्री से सम्मानित प्रोफेसर जी. एन. देवी ने बीज भाषण प्रस्तुत किया, जो संगोष्ठी का मुख्य आकर्षण रहा। उनके वक्तव्य में भारतीय भाषाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की गहराई से चर्चा की गई, जिसे उपस्थित विद्वानों ने सराहा।
कार्यक्रम के दौरान संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन किया गया, जिसमें स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों से जुड़े विभिन्न शोध पत्रों के वैचारिक नोट्स शामिल थे। साथ ही ‘हिंदी यूनिवर्सिटी जर्नल ऑफ इंटर-डिसिप्लिनरी स्टडीज’ (HUJIS) का भी विधिवत शुभारंभ किया गया, जो शोध और अकादमिक विमर्श को नई दिशा देगा।
इस संगोष्ठी के आयोजन में प्रोफेसर सुनीता मुर्मू, प्रोफेसर गौरहरि बेहरा और डॉ. आमोद कुमार राय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में प्रोफेसर आलोक कुमार, प्रोफेसर हेमेंद्र चंडालिया, प्रोफेसर एम. सी. बेहरा, प्रोफेसर अंजलि दैमारी, प्रोफेसर ओम प्रकाश द्विवेदी, प्रोफेसर वीणा बत्रा कुशवाहा, प्रोफेसर पंचानन दलाई, प्रोफेसर गोमती बोदरा हेम्ब्रोम, प्रोफेसर राहुल पटेल, प्रोफेसर करण सिंह, प्रोफेसर सादिक अहमद, अजीत कुमार कुल्लू और डॉ. रागिनी कपूर सहित कई विद्वानों ने अपने शोध और विचार प्रस्तुत किए।
यह संगोष्ठी स्वदेशी ज्ञान परंपराओं को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में समझने और अकादमिक विमर्श को समृद्ध करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।

