विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस पर “अटल माइंड टॉक” का अंतरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव, विशेषज्ञों ने दिया समावेशी समाज का संदेश
नई दिल्ली: संवाददाता प्रेरणा बुड़ाकोटी: विश्व स्तर पर मनाए जाने वाले World Autism Awareness Day के अवसर पर बिलासपुर, छत्तीसगढ़ स्थित अटल बिहारी वाजपेई ट्रस्ट (भाव फाउंडेशन) द्वारा “अटल माइंड टॉक” के अंतर्गत एक भव्य अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन कॉन्क्लेव का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के मनोवैज्ञानिकों, शिक्षकों, विशेषज्ञों एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और Autism Spectrum Disorder के प्रति जागरूकता फैलाने का व्यापक संदेश दिया।
इस ऑनलाइन कॉन्क्लेव में थेनी, हैदराबाद, चंडीगढ़, नई दिल्ली, कोलकाता, फरीदाबाद, अजमेर और गुरुग्राम सहित देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़े विशेषज्ञों ने भागीदारी निभाई। वक्ताओं ने ऑटिज़्म से जुड़े व्यवहारिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पहलुओं पर गहन चर्चा करते हुए अभिभावकों, शिक्षकों और समाज की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि समय पर पहचान, उचित काउंसलिंग और सहायक वातावरण से ऑटिज़्म से प्रभावित बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
कार्यक्रम में चेन्नई, लखनऊ, नोएडा और मुंबई जैसे महानगरों के साथ-साथ मलेशिया जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच से भी विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने समावेशी शिक्षा, भावनात्मक सहयोग, आर्ट थेरेपी, योग और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से ऑटिज़्म से जूझ रहे बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के उपायों पर प्रकाश डाला।
कॉन्क्लेव के दौरान यह भी जोर दिया गया कि समाज में ऑटिज़्म को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना अत्यंत आवश्यक है। विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे बच्चों को अलग नजर से देखने के बजाय उनकी क्षमताओं को पहचानकर उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में अपना योगदान दे सकें।
कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में जागरूकता बढ़ाने, संवेदनशीलता विकसित करने और एक समावेशी वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। “अटल माइंड टॉक” का यह अंतरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव ऑटिज़्म के प्रति समझ और सहयोग की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय पहल साबित हुआ।
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