राजौरी अभियान के दौरान अचेत हुए मांझी के जवान जय प्रकाश यादव का अंतिम संस्कार, राजकीय सम्मान के साथ दी गई विदाई
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: मांझी थाना क्षेत्र के चकिया गांव निवासी सेना के जवान जय प्रकाश यादव का पार्थिव शरीर सोमवार अहले सुबह मांझी पहुंचा, जहां हजारों लोगों की उपस्थिति में उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
वे राजौरी (जम्मू-कश्मीर) में आतंकवादियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के दौरान अचानक अचेत हो गए थे। इलाज के क्रम में शुक्रवार को उनका निधन हो गया। शहादत की खबर मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई थी। शव के घर पहुंचते ही परिजनों के रुदन से माहौल गमगीन हो गया और अंतिम दर्शन के लिए गांव एवं आसपास के क्षेत्रों से लोगों का तांता लग गया।
सोमवार को मांझी श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अनुमंडल पदाधिकारी की उपस्थिति में मांझी अंचलाधिकारी सौरव कुमार, थाना प्रभारी विनोद कुमार तथा दानापुर से आए सैनिक जवानों ने उन्हें राइफल सलामी दी। मुखाग्नि उनके भाई ने दी। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और नम आंखों से वीर सपूत को विदाई दी।
जय प्रकाश यादव वर्ष 2011 में 15 बिहार रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। लगभग छह वर्ष पूर्व उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) कमांडो का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया था।
परिवारिक स्थिति अत्यंत मार्मिक है। उनके पिता इंद्रदेव यादव पिछले एक माह से लकवाग्रस्त होकर पूरी तरह बेडरेस्ट हैं। वे तीन भाइयों एवं दो बहनों में सबसे छोटे थे। बड़े भाई प्रमोद यादव की लगभग 20 वर्ष पूर्व सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो चुकी है, जबकि दूसरे भाई ओम प्रकाश यादव घर पर रहकर खेतीबारी करते हैं।
मृतक अपने पीछे पत्नी श्वेता देवी, लगभग तीन वर्षीय पुत्र जस कुमार एवं पांच वर्षीय पुत्री नित्या कुमारी को छोड़ गए हैं। वर्ष 2019 में उनका विवाह सिवान जिले के चैनपुर ओपी अंतर्गत बखरी गांव में हुआ था।
चकिया गांव समेत पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। लोगों ने उन्हें कर्तव्यनिष्ठ, साहसी और देशभक्त जवान बताते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

