व्यवहार न्यायालय का आदेश दिया और सदर एसडीएम द्वारा प्रतिनियुक्ति दंडाधिकारी बहाल के आदेश को सारण पुलिस ने दिखाया ठेंगा
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: सारण जिले में पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आई है। जहां व्यवहार न्यायालय के आदेश की अवहेलना का मामला सामने आया है। मामला मुफस्सिल थाना क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां एक रेस्टोरेंट पिछले करीब दो माह से बंद पड़ा है, जबकि व्यवहार न्यायालय के सीजीएम द्वारा आवश्यक कार्रवाई का आदेश दिए जाने के बावजूद अभी तक ताला नहीं खोला गया है। इस मामले को लेकर पीड़ित व्यवसाई ने सारण पुलिस के वरीय पुलिस अधीक्षक से हस्तक्षेप करने की मांग की है। बताया जाता है कि रेस्टोरेंट संचालक हिमालय राज के द्वारा विगत 17 जनवरी 2026 को मुफस्सिल थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, जिसका कांड संख्या- 30/26 है। इसके बाद व्यवहार न्यायालय के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजीएम) ने मामले के जांच पदाधिकारी (आईओ) मुफस्सिल थाने के पुलिस अवर निरीक्षक धर्मेंद्र पाल को आवश्यक कार्रवाई करने का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश की हार्ड कॉपी 10 फरवरी को संबंधित अधिकारी को उपलब्ध कराई गई थी।लेकिन इसके बावजूद भी जांच पदाधिकारी द्वारा केवल आश्वासन दिया जाता रहा कि आज या कल रेस्टोरेंट का ताला खोल दिया जाएगा, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
रेस्टोरेंट संचालक हिमालय राज के अनुसार, उनका व्यवसाय पूरी तरह बंद हो चुका है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति चरमरा गई है। उनका कहना है कि व्यवसाय के लिए इंडसइंड बैंक, भारतीय स्टेट बैंक और पेटीएम से बिजनेस लोन लिए हुए है, जिसकी किस्तें अब रेस्टोरेंट बंद होने के कारण जमा नहीं हो पा रही हैं। आय का कोई स्रोत नहीं रहने से परिवार के सामने भी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इस मामले को लेकर मुफस्सिल थाना द्वारा सदर एसडीएम को पत्र लिखकर रेस्टोरेंट खोलने के लिए मजिस्ट्रेट की प्रतिनियुक्ति का अनुरोध किया गया था। इस पर सदर एसडीएम द्वारा 28 फरवरी को मजिस्ट्रेट की प्रतिनियुक्ति भी कर दी गई है। इसके बावजूद अभी तक रेस्टोरेंट का ताला नहीं खोला गया है, जिससे मुफस्सिल थाने की पुलिस के कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इस संबंध में पीड़ित द्वारा स्थानीय प्रशासन से मांग की गई है कि संबंधित थाने को अविलंब निर्देश देकर रेस्टोरेंट का ताला खुलवाया जाए, ताकि न्यायालय के आदेश का पालन हो सके और आम लोगों का कानून व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।

