घर-घर होगी कालाजार के संभावित मरीजों की खोज, आशा कार्यकर्ता देंगी दशतक
• आशा कार्यकर्ताओं को दिया जायेगा प्रशिक्षण
• 50-50 घरों में खोज करेंगी आशा कार्यकर्ता
• ग्राम पंचायत के मुखिया भी करेंगे अभियान में सहयोग
///जगत दर्शन न्यूज
सारण (बिहार): कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को आगे भी उसी स्तर पर बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध है। जिले में कालाजार के संभावित मरीजों की खोज के लिए आशा कार्यकर्ता दशत देंगी। घर-घर जाकर मरीजों की खोज की जायेगी। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NVBDCP), भारत सरकार के निर्देश के आलोक में कालाजार, पीकेडीएल (PKDL) और एचआईवी-वीएल (HIV-VL) के संभावित मरीजों की पहचान के लिए प्रभावित राजस्व गांवों में घर-घर सर्वे कराया जाएगा। इस कार्य के लिए आशा कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
200 से 250 घरों में सर्वे किया जाएगा
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2021, 2022, 2023, 2024 तथा वर्ष 2025 के नवंबर तक जिन क्षेत्रों में कालाजार के मरीज पाए गए हैं, वहां विशेष रूप से रोगी खोज अभियान चलाया जाएगा। ऐसे मरीजों के घर के चारों दिशाओं में स्थित 50-50 घरों में जाकर संभावित मरीजों की पहचान की जाएगी। इस प्रकार एक मरीज के आसपास अधिकतम 200 से 250 घरों में सर्वे किया जाएगा।
इन लक्षणों पर होगी विशेष नजर
अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ता उन लोगों की पहचान करेंगी जिन्हें 15 दिनों या उससे अधिक समय से बुखार हो और मलेरिया या एंटीबायोटिक दवा लेने के बाद भी बुखार ठीक न हुआ हो। इसके साथ ही भूख में कमी, शरीर में कमजोरी तथा पेट का असामान्य रूप से बढ़ना जैसे लक्षणों पर भी ध्यान दिया जाएगा। ऐसे व्यक्तियों को आरके-39 किट से जांच के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाएगा।
पूर्व में कालाजार पीड़ितों पर भी निगरानी
स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिया है कि यदि किसी व्यक्ति का पहले कालाजार का इलाज हो चुका है, लेकिन उसे फिर से बुखार के साथ कालाजार के लक्षण दिखाई देते हैं, तो आशा कार्यकर्ता उसे जांच के लिए सदर अस्पताल रेफर करेंगी और उसका नाम रेफरल पर्ची में दर्ज किया जाएगा। इसी प्रकार यदि किसी व्यक्ति को बुखार नहीं है, लेकिन शरीर की त्वचा पर चकत्ते या दाग दिखाई देते हैं और वह पहले कालाजार से पीड़ित रह चुका है, तो उसे भी जांच के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाएगा। इन सभी मामलों की प्रविष्टि रजिस्टर और रेफरल पर्ची में अनिवार्य रूप से की जाएगी।
आशा को मिलेगा प्रोत्साहन राशि
वीडीसीओ सतीश कुमार ने बताया कि एक आशा कार्यकर्ता प्रतिदिन अधिकतम 50 घरों में ही सर्वे करेगी। यदि वह कुल 250 घरों में संभावित मरीजों की खोज का कार्य पूरा करती है, तो उसे एकमुश्त 200 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। वहीं आशा फैसिलिटेटर को 300 रुपये की दर से भुगतान किया जाएगा, जो स्थानीय स्तर पर एसएनए के माध्यम से किया जाएगा।
पर्यवेक्षण और प्रशिक्षण की व्यवस्था
आशा कार्यकर्ताओं के कार्यों का पर्यवेक्षण आशा फैसिलिटेटर द्वारा किया जाएगा। साथ ही पीरामल स्वास्थ्य के पीएलसीडी तथा वीडीसीओ/वीबीडी कंसल्टेंट द्वारा आशा कार्यकर्ताओं को उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि अभियान प्रभावी तरीके से चलाया जा सके।
मुखिया का भी लिया जाएगा सहयोग
रोगी खोज अभियान शुरू करने से पहले संबंधित गांव के मुखिया को इसकी जानकारी दी जाए। अभियान के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों से भी सहयोग लिया जाएगा, जिससे घर-घर सर्वे में आसानी हो सके।
कंट्रोल रूम को भेजी जाएगी प्रतिदिन रिपोर्ट
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. भूपेंद्र कुमार ने बताया कि अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ताओं द्वारा प्रतिदिन चिन्हित किए गए संभावित मरीजों की संख्या, आरके-39 किट से हुई जांच और पॉजिटिव मामलों की जानकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जिला स्तर पर स्थित कंट्रोल रूम को भेजी जाएगी। इसके अलावा सभी आंकड़ों की प्रविष्टि KAMIS सॉफ्टवेयर में की जाएगी। जिन मरीजों में कालाजार की पुष्टि होगी, उनका उपचार और फॉलो-अप संबंधित प्रखंड के VBDS और Piramal के POCD की निगरानी में किया जाएगा। साथ ही पॉजिटिव मरीजों के गांवों में तुरंत फोकल स्प्रे कराया जाएगा, ताकि संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके।

