फाइलेरिया रोधी दवा को लेकर भ्रांतियां मिटा रहे पीएसपी सदस्य, 18 परिवारों ने तोड़ी झिझक, अपनाई सुरक्षा की डोज
- पीएसपी की पहल से मुस्लिम बस्ती के 65 लोगों ने पहली बार खाई फाइलेरिया रोधी दवा
- जहां कभी नहीं खाई गई दवा, वहां 65 लोगों ने एक साथ किया सेवन
- पीएसपी की पहल रंग लाई, मुस्लिम समुदाय ने बढ़-चढ़कर खाई दवा
सारण (बिहार): फाइलेरिया जैसी गंभीर और अपंगता पैदा करने वाली बीमारी के उन्मूलन की दिशा में सारण जिले में चल रहा सर्वजन दवा सेवन अभियान अब रंग लाने लगा है। वर्षों से दवा को लेकर चली आ रही आशंकाओं और भ्रांतियों को तोड़ते हुए पेशेंट स्टेक होल्डर प्लेटफॉर्म (पीएसपी) के सदस्यों ने समुदाय के बीच विश्वास की मजबूत नींव रखी है। इसका ताजा उदाहरण सारण जिले के रिविलगंज प्रखंड के आयुष्मान आरोग्य मंदिर के अंर्तगत भादपा पंचायत के रामपुर सीरिसिया गांव स्थित धोबी टोला में देखने को मिला, जहां मुस्लिम समुदाय के 18 परिवारों के कुल 65 लोगों ने पहली बार फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन किया।
सारण जिले में 10 से 27 फरवरी तक फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत सर्वजन दवा सेवन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को दवा खिला रही हैं। हालांकि कई क्षेत्रों में अब भी दवा को लेकर डर, अफवाह और गलत धारणाएं लोगों को दवा सेवन से रोकती रही हैं। रामपुर सीरिसिया का धोबी टोला भी उन्हीं इलाकों में शामिल था, जहां के लोग अब तक दवा खाने से परहेज करते आए थे।
भ्रांतियों की दीवार तोड़ रहें पीएसपी
इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में पीएसपी सदस्यों और स्थानीय प्रभावशाली लोगों ने अहम भूमिका निभाई। गांव के सरपंच मिनाज असगर, ग्रामीण चिकित्सक अरमान अंसारी और जीविका सीएनआरपी उषा देवी के सहयोग से समुदाय के बीच लगातार संवाद स्थापित किया गया। लोगों को सरल भाषा में यह समझाया गया कि फाइलेरिया क्या है, यह कैसे फैलता है और दवा सेवन क्यों जरूरी है। साथ ही यह भी बताया गया कि यह दवा राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत सुरक्षित रूप से दी जाती है और वर्षों से देशभर में करोड़ों लोग इसका सेवन कर रहे हैं।
पीएसपी सदस्य निरमला देवी और प्रमिला देवी ने बताया कि शुरुआत में लोगों में काफी हिचकिचाहट थी। कई लोगों को डर था कि दवा खाने से तबीयत खराब हो जाएगी या कोई गंभीर साइड इफेक्ट हो सकता है। लेकिन जब स्थानीय सरपंच, परिचित ग्रामीण चिकित्सक और जीविका से जुड़ी महिलाओं ने खुद आगे आकर भरोसा दिलाया, तो धीरे-धीरे माहौल बदलने लगा।
लगातार समझाइश और विश्वास के बाद 18 परिवारों के 65 लोग दवा सेवन के लिए तैयार हुए। यह इस मायने में खास है कि ये वे लोग थे, जिन्होंने पहले कभी फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन नहीं किया था। दवा सेवन स्वास्थ्य कर्मियों और पीएसपी सदस्यों की निगरानी में कराया गया, जिससे लोगों को और अधिक भरोसा मिला।
अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों को भी दवा सेवन के लिए प्रेरित करेंगे
दवा खाने के बाद समुदाय के कई लोगों ने कहा कि उन्हें अब समझ में आ गया है कि डर और अफवाह के कारण वे वर्षों से खुद को और अपने परिवार को जोखिम में डाल रहे थे। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि वे आगे अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों को भी दवा सेवन के लिए प्रेरित करेंगे।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, फाइलेरिया उन्मूलन तभी संभव है जब समाज का हर वर्ग इसमें भागीदारी निभाए। पीएसपी सदस्यों की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि संवाद, विश्वास और स्थानीय सहयोग से सबसे कठिन सामाजिक भ्रांतियों को भी तोड़ा जा सकता है। उम्मीद है कि रामपुर सीरिसिया की यह सफलता अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बनेगी और अधिक से अधिक लोग आगे आकर फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन करेंगे, ताकि सारण जिले को जल्द से जल्द फाइलेरिया मुक्त बनाया जा सके।

