अब पति भी निभाएंगे जिम्मेदारी, सास-बहू मिलकर लेंगी समझदारी का फैसला
• परिवार नियोजन में बढ़ेगी पुरुषों की भागीदारी
• सास-बहू सम्मेलन से घर-घर तक पहुंचेगा जागरूकता का संदेश
• 23 फरवरी से चलेगा मिशन परिवार विकास अभियान
• मुखिया और जनप्रतिनिधि भी करेंगे सहयोग
सारण (बिहार):मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी, स्वस्थ अंतराल और संतुलित परिवार के उद्देश्य से 23 फरवरी से 20 मार्च 2026 तक जिले में “मिशन परिवार विकास अभियान” चलाया जायेगा। इस अभियान को इस बार विशेष रूप से पुरुषों की भागीदारी और सास-बहू सम्मेलन के माध्यम से सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाने पर केंद्रित होगा। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जब परिवार नियोजन केवल महिलाओं की जिम्मेदारी न रहकर पूरे परिवार का साझा निर्णय बनेगा, तभी इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे। इसको लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के अपर कार्यपालक निदेशक कुमार गौरव (भा.प्र.से.) ने पत्र जारी कर सभी सिविल सर्जन को आवश्यक दिशा निर्देश दिया है।
पुरुषों की भागीदारी पर विशेष जोर
अभियान के दौरान पुरुष नसबंदी को बढ़ावा देने के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि पंचायत स्तर पर पुरुष समूह बैठकें, चौपाल संवाद और प्रेरक सत्र आयोजित कर यह बताया जाए कि परिवार नियोजन केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं है। पुरुष नसबंदी एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी प्रक्रिया है, जिसमें अस्पताल में कम समय लगता है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है। इसके बावजूद सामाजिक संकोच और भ्रांतियों के कारण पुरुष सहभागिता अपेक्षाकृत कम रही है। अभियान के तहत इन भ्रांतियों को दूर करने के लिए प्रशिक्षित चिकित्सक और काउंसलर ग्रामीण स्तर तक संवाद करेंगे। इसके साथ ही जिन पुरुषों ने स्वेच्छा से नसबंदी कराई है, उन्हें “परिवार नियोजन प्रेरक” के रूप में आगे लाकर अन्य लोगों को प्रेरित किया जाएगा। प्रोत्साहन राशि की समयबद्ध भुगतान व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है।
सास-बहू सम्मेलन से आयेगी समुदाय में बदलाव:
ग्रामीण और शहरी समुदायों में निर्णय प्रक्रिया में सास की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसे ध्यान में रखते हुए “सास-बहू सम्मेलन” आयोजित किए जाएंगे, जहां सही उम्र में विवाह, पहले बच्चे में दो वर्ष का अंतर और दो बच्चों के बीच कम से कम तीन वर्ष का अंतर रखने के महत्व पर चर्चा होगी।
इन सम्मेलनों में आंगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता और जीविका दीदियां मिलकर संवाद स्थापित करेंगी। नई पहल किट के माध्यम से गर्भनिरोधक साधनों की जानकारी दी जाएगी और शंकाओं का समाधान किया जाएगा।
सम्मेलन का उद्देश्य पीढ़ियों के बीच संवाद बढ़ाना है, ताकि परिवार नियोजन को लेकर घर के भीतर सकारात्मक वातावरण बन सके।
घर-घर संपर्क और पूर्व पंजीयन
23 फरवरी से 05 मार्च तक “दम्पत्ति संपर्क सप्ताह” के दौरान आशा और एएनएम घर-घर जाकर योग्य दम्पत्तियों की पहचान कर पूर्व पंजीयन करेंगी। Community Need Assessment के आधार पर स्थायी और अस्थायी साधनों की जानकारी दी जाएगी। 06 मार्च से 20 मार्च तक “परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा” के तहत सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में बंध्याकरण, IUCD, अंतरा इंजेक्शन, कंडोम, माला-एन एवं अन्य साधन उपलब्ध रहेंगे। Fixed Day Service (FDS) के तहत निर्धारित तिथियों पर शिविर आयोजित किए जाएंगे।
जनजागरूकता के विविध माध्यम
अभियान को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए ई-रिक्शा जागरूकता रथ, पंचायत स्तरीय बैठकें, युवा क्लबों की भागीदारी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाएगा। स्वास्थ्य मेले के माध्यम से भी लोगों को सेवाओं की जानकारी दी जाएगी। परिवार नियोजन पूरी तरह स्वैच्छिक और सुरक्षित है। जब पुरुष आगे आएंगे और सास-बहू मिलकर निर्णय लेंगी, तब ही स्वस्थ और खुशहाल परिवार का सपना साकार होगा। मिशन परिवार विकास इसी सामूहिक संकल्प की दिशा में एक मजबूत कदम है।
मुखिया और जनप्रतिनिधि भी करेंगे सहयोग:
इस अभियान के बेहतर प्रबंधन एवं अन्य विभागों से समन्वय के लिए जिला स्तर पर जिला पदाधिकारी के अध्यक्षता में सम्बद्ध विभाग- आईसीडीएस, पंचायती राज, जीविका, महादलित विकास मिशन इत्यादि के जिला स्तरीय पदाधिकारी सलाहकार एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी-सलाहकार के साथ समन्वय बैठक का आयोजन किया जाय, ताकि समुदाय स्तर पर आमजन को उत्प्रेरित करने में आशा, आंगनबाड़ी सेविका, जीविका दीदी, विकास मित्र आदि की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। आंगनवाड़ी सेविका, जीविका दीदी, पंचायती राज सदस्यों एवं विकास मित्र का उन्मुखीकरण कर पखवाड़ा के दौरान इच्छुक एवं योग्य दम्पतियों को परिवार कल्याण के अस्थाई एवं स्थाई उपाय अपनाने के लिए उत्प्रेरित किया जायेगा।

