पर्व त्यौहार/ संस्कृति:ईसाई धर्म
ईसा मसीह के जन्मदिन का त्योहार: क्रिसमस
✍️ राजीव कुमार झा
क्रिसमस ईसाई धर्मावलंबियों का सबसे महान त्योहार है और यह ईसा मसीह के जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है। ईसा मसीह का जन्म यरूशलेम में हुआ था और जिस दिन उनका जन्म हुआ उसी दिन से ईसा संवत् की शुरुआत भी हुई। उनकी मां का नाम मरियम और पिता का नाम जोसेफ था । ईसा मसीह के बारे में ऐसा कहा जाता है कि समाज, संस्कृति और धर्म के बारे में उनके नये विचारों से क्रुद्ध होकर तत्कालीन किसी यहूदी शासक ने उन्हें सूली पर लटका दिया था और जिसे लेकर ईसा मसीह बिल्कुल विचलित नहीं हुए थे और उन्होंने अपने समर्थकों को कहा था कि उनके प्रति यह नृशंसता करने वाले लोग अज्ञानी हैं और उनको उन्हें इसलिए क्षमा कर देना चाहिए। ईसाई धर्म में शत्रुता और प्रतिशोध की भावना से मनुष्य को जीवन में निरंतर दूर रहने का संदेश दिया गया है और यह धर्म मनुष्य को आपसी शांति और प्रेम का संदेश देता है। इस प्रकार ईसा मसीह युगांतरकारी व्यक्तित्व थे।
क्रिसमस के दिन गिरजाघर में ईसा मसीह का जन्मदिन मनाया जाता है। यूरोप में क्रिसमस के आने से पहले वहां के बाजारों में धूमधाम फैल जाती है और लोग विविध प्रकार की नयी चीजों की खरीदारी करते हैं। क्रिसमस के अवसर पर वहां सुंदर गीत गाये जाते हैं और लोग चर्च में जाते हैं।
ईसा मसीह को संसार का महान महापुरुष माना जाता है और उन्होंने सारी दुनिया को धर्म के रूप में मानवता का संदेश दिया। ईसाई धर्म में करुणा और दीन दुखियों की सेवा को मनुष्य का सबसे पावन कर्तव्य कहा गया है इसलिए इस धर्म से जुड़ी मिशनरी संस्थाएं आज भी संसार के सभी हिस्सों में गरीबों, असहायों, निराश्रितों और रोगियों की सेवा में संलग्न दिखाई देते हैं। ईसा मसीह ने अज्ञानता को मानवता का सबसे बड़ा अभिशाप भी कहा है इसलिए ईसाई संस्थाएं शिक्षा संस्थानों की स्थापना की एक माध्यम से ज्ञान के आलोक से मनुष्य की चेतना के उत्थान के कार्य में भी निरंतर सक्रिय बनी हुई हैं।
ईसा मसीह ने मनुष्य को तमाम तरह के पापों से दूर रहने का संदेश भी दिया है। उन्होंने इसके लिए पापों के प्रायश्चित के रूप में पुण्य के रूप में श्रेष्ठ कर्मों की ओर सबको अग्रसर होने का संदेश दिया है। उनका मानना था कि इससे सभी मनुष्य अपने जीवन का उद्धार कर सकते हैं। यूरोप के तमाम देशों के ज्यादातर लोग ईसाई धर्म को मानने हैं। इसके अलावा दुनिया के अन्य देशों में भी आधुनिक काल में ईसाई धर्म का प्रचार प्रसार हुआ।

