बाढ़ पीड़ितों को इसी सप्ताह मिलेगी 7 हजार रुपये की सहायता, छह माह में पुनर्निर्माण पर जोर
सांसद राजीव प्रताप रूडी ने अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक, फसल, मकान और मवेशियों की क्षति का आकलन जल्द पूरा करने का निर्देश
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: सारण जिले के आधा दर्जन से अधिक प्रखंडों में बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण की चुनौती सामने है। बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा उपलब्ध कराने के साथ सड़कों, पुलों, तटबंधों और बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। अगले छह माह में बुनियादी ढांचे की बहाली पर विशेष जोर दिया जाएगा।
शुक्रवार को सारण के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बाढ़ के बाद की स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने राहत वितरण, स्वास्थ्य सुविधाओं, क्षति के आकलन और पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया।
सांसद ने कहा कि नेपाल में अत्यधिक बारिश और अप्रत्याशित जलप्रवाह के कारण सारण सहित बिहार के कई इलाकों में बाढ़ से व्यापक नुकसान हुआ है। सरयू, गंगा और गंडक नदियों से घिरे सारण जिले के पानापुर, तरैया, मकेर, अमनौर, दरियापुर, परसा, सोनपुर और रिविलगंज के विभिन्न इलाके प्रभावित हुए। कई स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुए, जबकि घरों, फसलों, मवेशियों, सड़कों और बिजली व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा है।
पात्र परिवारों के खाते में इसी सप्ताह पहुंचेगी सात हजार रुपये की सहायता
समीक्षा बैठक में बाढ़ प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। रूडी ने कहा कि प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में सात हजार रुपये की सहायता राशि भेजी जा रही है। पात्र लाभार्थियों तक इसी सप्ताह राशि पहुंचाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों की फसल क्षति, क्षतिग्रस्त मकानों और मवेशियों के नुकसान का आकलन कर नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। क्षति आकलन की प्रक्रिया में किसी भी प्रभावित क्षेत्र या पात्र परिवार की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
सांसद ने बताया कि बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को मुआवजा वितरित किया जा चुका है। यदि कोई पात्र परिवार अब भी सहायता से वंचित है, तो उसे तत्काल राहत उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई की जाए।
छह माह में सड़क, पुल और तटबंधों की बहाली का लक्ष्य
बाढ़ से क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत और पुनर्निर्माण को लेकर सांसद ने संबंधित विभागों को कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अगले छह माह के दौरान सड़क, ग्रामीण सड़क, पुल, तटबंध और बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
इस कार्य में सड़क निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और विद्युत विभाग समेत संबंधित एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। सांसद ने फसल, मकान, सड़क और तटबंधों की क्षति का अंतिम आकलन भी जल्द पूरा करने पर जोर दिया, ताकि पुनर्निर्माण और मुआवजे की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।
बाढ़ के बाद बीमारियों की रोकथाम पर जोर
बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित इलाकों में संक्रामक बीमारियों और महामारी फैलने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य एवं स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने का निर्देश दिया गया।
सांसद ने प्रभावित गांवों में चिकित्सा शिविर लगाने, लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत देने के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा भी प्राथमिकता होनी चाहिए।
सांसद कंट्रोल रूम के जरिए पहुंचाई गई मदद
रूडी ने बाढ़ के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में जिला प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग, जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों के योगदान की सराहना की।
उन्होंने बताया कि बाढ़ के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मुख्य सचिव तथा जल संसाधन विभाग के मंत्री और अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया। प्रभावित लोगों की समस्याओं और जरूरतों की जानकारी लेकर सहायता पहुंचाने के लिए सांसद कंट्रोल रूम के टोल-फ्री नंबर 18003456222 के माध्यम से भी प्रयास किए गए।
सांसद ने कंट्रोल रूम की टीम, मीडिया और राहत कार्यों में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
बैठक में सदर एसडीओ नीतेश कुमार, मढ़ौरा एसडीओ सैयद अदील मोहसिन, सोनपुर एसडीओ स्निग्धा नेहा, सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी, अमनौर के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शशांक शुभम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

