सात महीने से वेतन बंद, फिर भी बाढ़ पीड़ितों के लिए खोला दिल; एक हजार फूड पैकेट बांटकर पेश की मानवता की मिसाल
खुद आर्थिक संकट से जूझ रहे कार्यपालक सहायकों ने चंदा जुटाकर महादलित बस्तियों तक पहुंचाई राहत, अब लंबित वेतन भुगतान का इंतजार
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: सारण जिले में खुद आर्थिक तंगी झेल रहे कार्यपालक सहायकों ने आपसी सहयोग से राशि जुटाकर बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई। वेतन संकट के बीच उनकी इस पहल ने मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी की एक अलग तस्वीर पेश की है। बिहार राज्य कार्यपालक सहायक सेवा संघ की सारण जिला इकाई के जिलाध्यक्ष नागमणि प्रसाद और प्रदेश अध्यक्ष नीलेश कुमार के नेतृत्व में परसा प्रखंड की मुजौना मुसहर टोली, महादलित बस्ती तथा मुजौना बाजार के समीप स्थित दलित बस्ती में राहत सामग्री का वितरण किया गया।
प्रदेश अध्यक्ष नीलेश कुमार ने बताया कि राहत अभियान के दौरान करीब एक हजार फूड पैकेट के साथ जरूरत की कई सामग्रियां बांटी गईं। राहत सामग्री में सेनेटरी नैपकिन, दूध के पैकेट, बिस्कुट, भुंजा, इलेक्ट्रॉल पाउडर और सेवलॉन समेत अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल थीं। इसका उद्देश्य बाढ़ की मार झेल रहे जरूरतमंद परिवारों को संकट की घड़ी में राहत पहुंचाना था।
बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आए इन कार्यपालक सहायकों की पहल ने सहयोग और संवेदना का संदेश दिया है। हालांकि, इस मानवीय प्रयास के बीच उनका अपना वेतन संकट भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। दूसरों को राहत पहुंचाने वाले ये कर्मी खुद महीनों से वेतन भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। राहत अभियान ने जहां सामाजिक जिम्मेदारी और आपसी सहयोग की मिसाल पेश की, वहीं लंबित वेतन भुगतान की जरूरत को भी रेखांकित किया।
दूसरों के दर्द पर भारी नहीं पड़ा अपना संकट
संघ के जिलाध्यक्ष नागमणि प्रसाद ने बताया कि आवास विभाग और मनरेगा में कार्यरत कार्यपालक सहायकों का पिछले सात महीने से वेतन लंबित है। वहीं, पीआरडी और सामाजिक सुरक्षा विभाग समेत अन्य विभागों के कार्यपालक सहायकों को भी तीन महीने से भुगतान नहीं मिला है।
वेतन नहीं मिलने के कारण कार्यपालक सहायकों के सामने घरेलू खर्च और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती बनी हुई है। ऐसे में राहत सामग्री के वितरण के लिए राशि जुटाना आसान नहीं था। इसके बावजूद कर्मियों ने अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग किया और बाढ़ प्रभावित जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया।
कार्यपालक सहायकों का यह कदम बताता है कि आर्थिक परेशानियों के बीच भी दूसरों की मदद करने और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का भाव कायम रह सकता है। एक ओर उन्होंने बाढ़ पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाकर मानवीय संवेदना का परिचय दिया, तो दूसरी ओर उनका लंबित वेतन भुगतान अब भी चिंता का विषय बना हुआ है।
राहत वितरण के दौरान रितेश कुमार, सोनू कुमार, नीरज कुमार, अमिताभ कुमार, सुशील कुमार शर्मा और गणेश कुमार समेत दर्जनों लोग मौजूद रहे।

