पितृपक्ष में गांव से शहर तक गूंजा तर्पण का आस्था भाव
आमी गंगातट पर उमड़े श्रद्धालु, पितरों के निमित्त तर्पण कर मांगा सुख-समृद्धि और मोक्ष का आशीर्वाद
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: पितृपक्ष शुरू होते ही सारण में गांव से लेकर शहर तक पितरों के प्रति श्रद्धा और आस्था का भाव दिखाई देने लगा है। आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक चलने वाले पितृपक्ष में सनातन धर्मावलंबी अपने पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म कर रहे हैं। सुबह से ही नदी घाटों, तालाबों और अन्य धार्मिक स्थलों पर लोग पितरों को जल अर्पित करते नजर आ रहे हैं। पितृपक्ष को पितरों के स्मरण और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार पितृपक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनकी स्मृति को जीवित रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
आमी गंगातट पर सुबह से पहुंच रहे श्रद्धालु:
इस संबंध में आचार्य राजेश कुमार तिवारी ने बताया कि शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, विधि- विधान से पितरों का तर्पण और श्राद्ध करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता में इसे अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति का माध्यम बताया गया है। साथ ही पितृदोष के प्रभाव को कम करने के लिए भी तर्पण और श्राद्ध कर्म को महत्वपूर्ण माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान आमी स्थित गंगातट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा रही है। आसपास के गांवों के साथ- साथ दूर- दराज से भी लोग यहां पहुंच कर गंगा स्नान के बाद अपने पितरों के निमित्त तर्पण कर रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार आमी गंगातट पर तर्पण करने का विशेष महत्व है। श्रद्धालु विधि- विधान से जल, तिल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर अपने पूर्वजों का स्मरण कर रहे हैं।
आमी मंदिर के पुजारी लक्ष्मीश्वर तिवारी ने बताया कि मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान पितर अपने परिजनों के बीच आते हैं और उनके द्वारा किए गए श्राद्ध एवं तर्पण से संतुष्ट होते हैं। वहीं चंदन बैठा, रामसागर राम, रमेश यादव, संतोष सिंह, सुरेश तिवारी, अभिनव मिश्र, शिकंजा सिंह, सुनील महतो, शिव साह, भुवन प्रसाद और शशिरंजन सिंह ने बताया कि पितरों के प्रति श्रद्धा और तर्पण की परंपरा सभी के लिए महत्वपूर्ण है। जिन लोगों को अपने पितरों की तिथि ज्ञात नहीं है, वह अमावस्या के दिन तर्पण कर सकते हैं।

