स्त्री शक्ति और हिंदी के नव रसों का अनूठा संगम, राजकीय महिला महाविद्यालय में काव्य-पाठ व कथा-वाचन प्रतियोगिता संपन्न
हिंदी दिवस पखवाड़े के तहत छात्राओं ने कविता और कहानियों के माध्यम से सामाजिक चेतना, राष्ट्रप्रेम, व्यंग्य और हिंदी के गौरव को किया अभिव्यक्त
✍️संवाददाता प्रेरणा बुड़ाकोटी
रोहतक (रोहतक): स्त्री शक्ति संगठन की ओर से राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय, रोहतक के हिंदी विभाग प्रांगण में हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रज्ञा साहित्यिक मंच एवं स्पंदन संस्था ने सहयोग किया। हिंदी दिवस पखवाड़े के अंतर्गत हिंदी एवं हरियाणवी काव्य-पाठ तथा कथा-वाचन प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें छात्राओं ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का आयोजन स्त्री शक्ति संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्षा ममता शर्मा एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शमशेर सिंह हुड्डा के नेतृत्व में हुआ। मुख्य अतिथि प्रज्ञा साहित्यिक मंच के संस्थापक एवं अध्यक्ष प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. अनूप बंसल ‘मधुकांत’ रहे। वहीं, स्पंदन संस्था के संस्थापक पवन गहलोत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
दीप प्रज्ज्वलन एवं छात्राओं द्वारा प्रस्तुत मां सरस्वती की वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके बाद प्राचार्य डॉ. शमशेर सिंह हुड्डा ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।
कविताओं और कहानियों से छात्राओं ने बांधा समां
प्रतियोगिताओं में छात्राओं ने सामाजिक सरोकार से लेकर हिंदी के गौरव, राष्ट्रप्रेम और समकालीन मुद्दों तक विभिन्न विषयों को अपनी रचनाओं के माध्यम से सामने रखा।
ज्योति ने ‘मैं बेटी हूं’ कविता के माध्यम से बेटियों की स्थिति पर चिंता जताई। नैंसी ने अपनी कहानी के जरिए मेहनत और जिजीविषा को रेखांकित किया, जबकि स्नेहा ने संघर्ष करते हुए कभी हार न मानने का संदेश दिया।
हिंदी की समृद्ध परंपरा और आधुनिक दौर में इसकी प्रासंगिकता को भी छात्राओं ने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। सीमा ने हिंदी की समृद्ध परंपरा का वर्णन किया। अंजली ने जेन-जी के बीच हिंदी की बढ़ती लोकप्रियता पर विचार रखा, जबकि पूर्वी ने विश्व पटल पर हिंदी की बढ़ती पहुंच को रेखांकित किया। अन्नू ने ‘क’ से ‘ज्ञ’ तक वर्णमाला पर आधारित अनूठी कविता प्रस्तुत की।
हिंदी को लेकर व्यंग्य और गंभीर सवाल
कार्यक्रम में हिंदी की वर्तमान स्थिति को लेकर छात्राओं ने गंभीर सवाल भी उठाए। दिव्या ने अपनी पंक्तियों के माध्यम से हिंदी के द्वितीय विकल्प बन जाने की स्थिति पर सवाल खड़ा किया। नेहा ने वर्ष में केवल एक दिन हिंदी दिवस मनाने की औपचारिकता पर विचार व्यक्त किया।
खुशी ने कहा कि अंग्रेजी का ज्ञान एक हुनर हो सकता है, लेकिन संस्कारों की जड़ें हिंदी में निहित हैं।
राष्ट्रप्रेम और ओज से जुड़े प्रस्तुतियों ने भी खूब प्रभाव छोड़ा। साक्षी ने शहीदों को नमन किया, फलक ने ‘रश्मिरथी’ के तृतीय सर्ग का ओजस्वी पाठ किया और नेहा ने अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध कविता ‘कदम मिलाकर चलना होगा’ प्रस्तुत की।
एमए की छात्रा ने प्रेमचंद की कालजयी कहानी ‘कफन’ का मार्मिक वाचन किया। ज़ीनत ने मानवता की सेवा को वास्तविक खुशी बताया। वहीं एमए की छात्रा अन्नू ने हरियाणवी में भ्रष्टाचार विरोधी कविता प्रस्तुत की।
‘हिंदी हमारी मां के समान है’
मुख्य अतिथि डॉ. अनूप बंसल ‘मधुकांत’ ने कहा कि हिंदी हमारी मां के समान है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जीवन में चाहे जितनी सफलता हासिल कर ले, अंततः मां की गोद में ही लौटता है। लेखन को आत्माभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके जरिए मन की बेचैनी और भावनाओं को अभिव्यक्त किया जा सकता है।
इस अवसर पर डॉ. मधुकांत द्वारा संपादित पुस्तक ‘महारानी लक्ष्मीबाई के प्रेरक प्रसंग’ का विमोचन भी किया गया।
अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. किरण शर्मा ने वीर रस से ओतप्रोत कविता का पाठ किया। विशिष्ट अतिथि पवन गहलोत ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से छात्राओं का उत्साहवर्धन किया।
प्रतियोगिता में इन्होंने हासिल किए स्थान
हिंदी काव्य-पाठ:
प्रथम — पूर्वी, बीए प्रथम वर्ष
द्वितीय — अंजली लांबा, बीए प्रथम वर्ष
तृतीय — अन्नू, एमए द्वितीय वर्ष
कथा-वाचन:
प्रथम — बीए तृतीय वर्ष की छात्रा
द्वितीय — अन्नू, एमए द्वितीय वर्ष
तृतीय — अंजली, एमए तृतीय वर्ष
हरियाणवी काव्य-पाठ:
प्रथम — अन्नू, एमए
निर्णायक मंडल में डॉ. अंजना रानी गर्ग, प्रो. किरण शर्मा एवं डॉ. नरेश कुमारी शामिल रहीं। परिणाम की घोषणा डॉ. अंजना गर्ग ने की।
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. विशाल एवं एमए की छात्रा अन्नू ने संयुक्त रूप से किया।
अभिव्यक्ति आत्मविश्वास की पहली सीढ़ी
समापन पर स्त्री शक्ति संगठन की संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्षा ममता शर्मा ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि अभिव्यक्ति और दूसरों के मनोभावों को समझना आत्मविश्वास की पहली सीढ़ी है। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ममता शर्मा ने सफल आयोजन के लिए महाविद्यालय परिवार को बधाई दी। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में हिंदी विभाग के समस्त आचार्य एवं छात्राएं उपस्थित रहीं।

