बाढ़ में डूबे बिनटोली के लिए मसीहा बने दाऊद अली, भंडारे से पेश कर रहे सामाजिक समरसता की मिसाल
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: दाहा नदी का रिंग बांध टूटने के बाद इमादपुर बिनटोली गांव चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिर गया है। बाढ़ की विभीषिका के बीच जहां ग्रामीणों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है, वहीं मांझी के सामाजिक कार्यकर्ता दाऊद अली बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आए हैं। वे अपने स्तर से पीड़ित परिवारों तक भोजन पहुंचाने के साथ ही गांव में सामूहिक भंडारे का आयोजन कर रहे हैं।
बिनटोली गांव में बीन जाति के परिवारों की संख्या अधिक है। गांव में सुफियान मियां का एकमात्र मुस्लिम परिवार बताया जाता है। इसी परिवार के दरवाजे पर मंगलवार से दाऊद अली की ओर से भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। इसमें गांव के महिला, पुरुष और बच्चे एक साथ पंगत में बैठकर भोजन कर रहे हैं।
भाड़े की नाव से घर-घर पहुंचाया जा रहा भोजन
दाऊद अली ने बताया कि बाढ़ के पानी के कारण कई परिवार अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। ऐसे में कोई भूखा न रहे, इसके लिए उन्होंने अपने खर्चे पर नाव किराये पर ली है। कार्यकर्ताओं की टीम नाव के माध्यम से चावल, दाल, पूड़ी-सब्जी सहित तैयार भोजन लेकर बाढ़ से घिरे परिवारों तक पहुंच रही है।
बाढ़ के पानी से घिरे घरों तक नाव के जरिए भोजन पहुंचने से प्रभावित परिवारों को काफी राहत मिल रही है।
बाढ़ के बीच हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश
बाढ़ की मुश्किल घड़ी में दाऊद अली की यह पहल सामाजिक समरसता और इंसानियत की मिसाल बन गई है। हिंदू बहुल गांव में एक मुस्लिम परिवार के दरवाजे से पूरे गांव के लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था किया जाना आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब का संदेश दे रहा है।
बाढ़ जैसी आपदा के समय जाति और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर जरूरतमंदों की मदद करने की इस पहल की स्थानीय स्तर पर सराहना हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि संकट की इस घड़ी में सामूहिक सहयोग और भाईचारे की भावना ही सबसे बड़ी ताकत है।

