हिंदी दिवस (14 सितंबर)
यह मेरी हिंदी भाषा है
कितनी उज्जवल कितनी शीतल
कितनी सरल सुलभ भाषा है,
लाखों के कंठो से निकली,
यह मेरी हिंदी भाषा है।
सुखी दुखी दोनों में रम कर
अंदर से सुख-दुख दिखलाती,
ऊच -नीच का भेद मिटाकर,
जीवन को गतिशील बनाती,
जीवन के हर क्षेत्र जगत में
हिंदी गति लाने वाली है,
हर दिन के क्रियाकलापों में
हिंदी छा जाने वाली है,
भले समय कुछ लग जाए पर,
हिंदी छा जाने वाली है।
जनमानस की भाषा बनकर
हिंदी गति लाने वाली है,
तभी राष्ट्र के प्रति हम सच्चा प्यार
दिखा पाएंगे बापू के सपनों को
तब ही हम साकार बन पाएंगे।
इसीलिए सब एक साथ
हिंदी भाषा में रम जाओ,
कामकाज सब घर- दफ्तर के
हिंदी में ही निपटाओं।
हिंदी को ही अपनाओ
हिंदी को ही अपनाओ।

