बिहार में परिवार नियोजन के नए विकल्पों को बढ़ावा, 2025-26 में 5,873 महिलाओं ने लगवाया सब-डर्मल इम्प्लांट
22,486 महिलाओं ने चुना MPA सबक्यूटेनियस, चयनित जिलों में उपलब्ध है सुविधा
पटना (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: बिहार में परिवार नियोजन के लिए लंबे और अस्थायी गर्भनिरोधक साधनों के नए विकल्पों को लेकर महिलाओं की स्वीकार्यता बढ़ रही है। वर्ष 2025-26 में राज्य की 5,873 महिलाओं ने सब-डर्मल इम्प्लांट लगवाया, जबकि इसी अवधि में 22,486 महिलाओं ने MPA सबक्यूटेनियस का विकल्प चुना।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, चयनित जिलों में प्रशिक्षित चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से दोनों गर्भनिरोधक विकल्पों की सुविधा लाभार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही है।
पिछले साल की तुलना में बढ़ी स्वीकार्यता
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में बिहार में 2,420 महिलाओं ने सब-डर्मल इम्प्लांट लगवाया था, जबकि 3,800 महिलाओं ने MPA सबक्यूटेनियस को अपनाया था। 2025-26 में दोनों विकल्पों को अपनाने वाली महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
तीन साल तक गर्भनिरोध से सुरक्षा देता है इम्प्लांट
सब-डर्मल इम्प्लांट माचिस की तीली के आकार की छोटी, पतली और लचीली रॉड होती है, जिसे महिला की बांह की त्वचा के नीचे लगाया जाता है। यह तीन वर्ष तक अनचाहे गर्भ से सुरक्षा प्रदान करता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई महिला तीन वर्ष से पहले गर्भधारण करना चाहती है तो इम्प्लांट को हटाने के बाद सामान्यतः अपेक्षाकृत जल्द ही गर्भधारण की क्षमता वापस आ सकती है। यही विशेषता इसे लंबे अंतराल के लिए परिवार नियोजन चाहने वाली महिलाओं के लिए एक विकल्प बनाती है।
बिहार के 13 जिलों में उपलब्ध है इम्प्लांट की सुविधा
सब-डर्मल इम्प्लांट लगाने की सुविधा बिहार के 13 जिलों के चयनित स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध कराई जा रही है। इनमें अररिया, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, गया, भागलपुर, नालंदा, पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा, मुजफ्फरपुर, सारण, पटना और पश्चिम चंपारण शामिल हैं।
इम्प्लांट की सुविधा सबसे पहले पटना और भागलपुर में प्रायोगिक तौर पर शुरू की गई थी।
MPA सबक्यूटेनियस भी महिलाओं के लिए नया विकल्प
MPA सबक्यूटेनियस तीन महीने के लिए अस्थायी गर्भनिरोधक विकल्प है। इसे अंतरा इंजेक्शन का उन्नत संस्करण बताया गया है। यह प्री-लोडेड इंजेक्शन है और तकनीकी रूप से इस तरह तैयार किया गया है कि इसे लगाने में पहले की तुलना में कम चुभन महसूस हो सकती है।
राज्य के 15 जिलों—औरंगाबाद, बेगूसराय, बक्सर, जहानाबाद, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, मधुबनी, मुंगेर, शेखपुरा, शिवहर, सीतामढ़ी, सीवान, सुपौल और वैशाली—के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में महिलाओं को MPA सबक्यूटेनियस की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इस पायलट परियोजना की शुरुआत शेखपुरा जिले से की गई थी।
काउंसलिंग से बढ़ रही स्वीकार्यता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, महिलाओं को गर्भनिरोधक विकल्पों की सही जानकारी और प्रभाव, अवधि तथा इस्तेमाल की प्रक्रिया के बारे में काउंसलिंग दिए जाने से इन साधनों की स्वीकार्यता बढ़ रही है।
परिवार नियोजन में महिलाओं की जरूरत और उनकी पसंद के अनुसार अलग-अलग विकल्प उपलब्ध होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सब-डर्मल इम्प्लांट जहां तीन साल तक गर्भधारण टालने का विकल्प देता है, वहीं MPA सबक्यूटेनियस तीन महीने के अंतराल के लिए अस्थायी गर्भनिरोधक विकल्प उपलब्ध कराता है।
बिहार में इन विकल्पों को अपनाने वाली महिलाओं की बढ़ती संख्या से संकेत मिलता है कि परिवार नियोजन के आधुनिक साधनों को लेकर जागरूकता और स्वीकार्यता धीरे-धीरे बढ़ रही है।

