शिक्षक दिवस पर स्त्री शक्ति संगठन एवं प्रज्ञा साहित्यिक मंच का भव्य आयोजन
शिक्षकों का समर्पण ही गढ़ता है आदर्श समाज
प्रेरणा बुडाकोटी | दिल्ली।
शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर को मॉडल टाउन स्थित पुस्तकालय में स्त्री शक्ति संगठन एवं प्रज्ञा साहित्यिक मंच के संयुक्त तत्वावधान में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्यामलाल कौशल ने की, जबकि मंच संचालन ममता शर्मा ने किया।
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण में हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत पवित्र ‘ॐ’ के उच्चारण और ज्ञान एवं चेतना की देवी महाविद्या के स्मरण के साथ हुई। इसके बाद सुषमा जोशी एवं कृष्ण लाल गिरधर ने वैदिक मंत्रोच्चार और प्रार्थना प्रस्तुत की। इससे पूरा वातावरण आध्यात्मिकता और ज्ञान की ऊर्जा से भर उठा।
कविता, अनुभव और संस्मरणों से सजा पहला सत्र
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में शिक्षक सदस्यों ने अपने अध्यापन अनुभवों को कविता, कथा और संस्मरणों के माध्यम से साझा किया।
अंग्रेजी शिक्षक एवं साहित्यकार कृष्ण लाल गिरधर ने अपनी कविता के माध्यम से शिक्षक के मूल कर्तव्यों और गुणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीक, गूगल अथवा AI कभी भी एक संवेदनशील और समर्पित शिक्षक का स्थान नहीं ले सकते।
रेवाड़ी की अंग्रेजी शिक्षिका पूनम भोला ने ‘प्रेरणा पंख’ शीर्षक कविता के माध्यम से अपनी अध्यापन यात्रा के प्रेरणादायी अनुभव साझा किए। वहीं साहित्यकार हेमचंद्र मलिक ने गुरु महिमा पर आधारित संगीतमय गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में भावपूर्ण रंग भर दिया।
गणित एवं अबेकस शिक्षिका कीर्ति चुग ने ‘गणित का जादू’ कविता प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों की सराहना प्राप्त की।
शिक्षा केवल किताबों और कक्षा तक सीमित न रहे : ममता शर्मा
स्त्री शक्ति संगठन की अध्यक्ष ममता शर्मा ने शिक्षक के दो प्रमुख कर्तव्यों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक का पहला दायित्व विद्यार्थी में संपूर्ण चेतना जागृत कर उसे एक आदर्श मनुष्य और जिम्मेदार नागरिक बनाना है। दूसरा दायित्व विद्यार्थियों में ऐसे व्यावहारिक कौशल विकसित करना है, जिनका उपयोग वे जीवन के हर क्षेत्र और हर परिस्थिति में कर सकें।
उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहता है और समाज में कूड़ा-कचरा तथा प्रदूषण फैला हुआ है, तो केवल कक्षा में स्वच्छता का पाठ पढ़ाने का कोई वास्तविक अर्थ नहीं है।
उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थी जीवन की विभिन्न परिस्थितियों में अपने कौशल का बेहतर प्रदर्शन करते हुए सफलता हासिल कर सके।
शिक्षा, खेल और समाज सेवा की प्रतिभाओं का सम्मान
समारोह में शिक्षा, खेल और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।
कोच राकेश बधवार, DSO एकेडमी के संस्थापक, को खेल और प्रशिक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने रोहतक के करीब 300 विद्यालयों में प्रशिक्षण दिया है और जिले में पहली बार ओलंपिक खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद बच्चों को नि:शुल्क प्रशिक्षण देकर राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने के लिए भी उनका उल्लेख किया गया।
सुषमा जोशी, खानपुर यूनिवर्सिटी की पूर्व प्राचार्या, को शिक्षा के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उन्हें राष्ट्रपति सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।
वहीं शिक्षा, साहित्य और सामाजिक क्षेत्र में योगदान के लिए पवन गहलोत को भी सम्मानित किया गया।
‘श्री ईश्वर चंद्र विद्यासागर के प्रेरक प्रसंग’ का लोकार्पण
समारोह में स्वर्गीय श्रीमती इन्द्रा स्वप्न द्वारा रचित तथा प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं रोहतक के गौरव डॉ. मधुकांत द्वारा संपादित पुस्तक ‘श्री ईश्वर चंद्र विद्यासागर के प्रेरक प्रसंग’ का संयुक्त रूप से लोकार्पण किया गया।
वक्ताओं ने पुस्तक को शिक्षकों के लिए प्रेरणादायी और पठनीय बताते हुए कहा कि इसमें ऐसे प्रसंग हैं, जो शिक्षक समुदाय को अपने दायित्वों के प्रति नई ऊर्जा प्रदान कर सकते हैं।
कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में अनूप बंसल मधुकांत, युधिष्ठिर लाल असीजा, ममता शर्मा, पूनम भोला, वंदना, सुषमा जोशी, राकेश बधवार, पवन गहलोत, कीर्ति चुग, वंदना राजोरिया, मीनू, कृष्ण लाल, श्यामलाल कौशल तथा एच.सी. मलिक सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी के चरित्र, चेतना और कौशल का निर्माता होता है। यही समर्पण एक बेहतर विद्यार्थी, बेहतर नागरिक और अंततः आदर्श समाज के निर्माण की नींव रखता है।

