108 साल से कायम है छठु सिंह परिवार की एकता, 148 सदस्य आज भी एक चूल्हे पर खाते हैं खाना
सारण के ककढ़िया गांव में संयुक्त परिवार की अनूठी मिसाल, छठी पीढ़ी तक कायम हैं संस्कार और परंपराएं
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: आधुनिक दौर में जहां संयुक्त परिवार तेजी से बिखर रहे हैं और लोग अलग-अलग रहकर अपना जीवन बिताना पसंद कर रहे हैं, वहीं सारण जिले के नगरा प्रखंड के ककढ़िया गांव में स्व. छठु सिंह का परिवार आज भी एकता, संस्कार और पारिवारिक परंपरा की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। करीब 108 वर्ष पहले 18 कट्ठा जमीन पर बने खपरैल के मकान से शुरू हुआ यह परिवार आज छठी पीढ़ी तक पहुंच चुका है और परिवार के कुल 148 सदस्य इसकी कड़ी से जुड़े हुए हैं।
देश के अलग-अलग शहरों में घर, लेकिन गांव में एक ही चूल्हा
परिवार के करीब 90 फीसदी सदस्य रोजगार और अन्य कारणों से देश के अलग-अलग शहरों में घर बनाकर रहते हैं। इसके बावजूद शादी-विवाह, त्योहार अथवा पारिवारिक समारोह के अवसर पर सभी सदस्य अपनी जड़ों की ओर लौटते हैं। गांव पहुंचने के बाद परिवार के पुरुष सदस्य मिलकर एक ही चूल्हे पर सभी के लिए भोजन तैयार करते हैं। इसके बाद महिला और पुरुष सदस्य सुबह-शाम दरवाजे पर एक साथ बैठकर पंगत में भोजन करते हैं। इतने बड़े परिवार में यह परंपरा आज भी उसी तरह कायम है, जैसी इसे परिवार के बुजुर्गों ने शुरू किया था।
एक मुख्य आंगन, तीन सहायक आंगन और साझा संसाधन
परिवार की व्यवस्था भी अपने आप में खास है। चार भाइयों से आगे बढ़े इस संयुक्त परिवार में एक मुख्य आंगन और तीन सहायक आंगन हैं। परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए तीन कुएं, करीब एक दर्जन शौचालय, सात चापाकल, सरकारी नल-जल योजना और करीब आधा दर्जन मोटर की व्यवस्था है।
परिवार के घरों से निकलने वाला पानी एक ही नाले के माध्यम से खेतों तक पहुंचता है। इसी पानी का उपयोग खेतों की सिंचाई और सब्जियों की खेती में किया जाता है। इतने बड़े परिवार के बावजूद आपसी तालमेल और साफ-सफाई को लेकर विशेष अनुशासन बनाए रखने का दावा परिवार के सदस्य करते हैं।
बुजुर्गों के बनाए नियम आज भी परिवार की पहचान
परिवार के मुखिया एवं सेना के सेवानिवृत्त जवान प्रेम कुमार सिंह बताते हैं कि परिवार के बुजुर्गों ने वर्षों पहले जो नियम और परंपराएं तय की थीं, उन्हें आज भी पूरी निष्ठा के साथ निभाया जाता है। पारिवारिक समारोहों में परिवार के कमाऊ सदस्य अपनी क्षमता और जरूरत के अनुसार आर्थिक सहयोग करते हैं। यही आपसी सहयोग परिवार की एकता का आधार माना जाता है।
सरकारी नौकरी से मजबूत हुई आर्थिक स्थिति
छठु सिंह परिवार की एक और खास पहचान शिक्षा और सरकारी सेवा से जुड़ी है। परिवार में करीब ढाई दर्जन सदस्य सरकारी नौकरी में कार्यरत बताए जाते हैं, जबकि सात सदस्य पेंशनधारी हैं। परिवार के अनुसार ठेकेदारी, व्यवसाय और खेती पर निर्भरता कम होने के बावजूद विभिन्न सेवाओं और रोजगार के माध्यम से परिवार की मासिक आमदनी करीब 50 से 60 लाख रुपये आंकी जाती है।
परिवार के लिए सबसे गौरव की बात यह बताई जाती है कि 18 वर्ष से अधिक उम्र का कोई भी युवक बेरोजगार नहीं है। परिवार के सदस्यों के अनुसार युवा या तो रोजगार में हैं अथवा उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
दशकों से विवादों से दूर रहने का दावा
इतने बड़े परिवार के बावजूद आपसी विवादों को लेकर भी यह परिवार अपनी अलग पहचान बताता है। परिवार के सदस्यों के अनुसार दशकों के इतिहास में परिवार से जुड़ा कोई बड़ा विवाद न्यायालय तक नहीं पहुंचा है। बुजुर्गों का सम्मान, आपसी सहयोग और सामूहिक निर्णय को परिवार की व्यवस्था का आधार बताया जाता है।
नवगछिया में 500 बीघा में बसा ‘छठु सिंह नगर’
छठु सिंह परिवार का विस्तार सारण तक ही सीमित नहीं रहा। परिवार के सदस्यों के अनुसार भागलपुर जिले के नवगछिया क्षेत्र में करीब 500 बीघा जमीन पर ‘छठु सिंह नगर’ बसाया गया है। हालांकि फिलहाल परिवार का कोई सदस्य वहां निवास नहीं करता। देश के विभिन्न शहरों में परिवार के सदस्यों ने अपने घर बनाए हैं, लेकिन पारिवारिक जड़ों से जुड़ाव अब भी बना हुआ है।
परिवार की करीब तीन दर्जन बेटियां और दामाद भी इस पारिवारिक रिश्ते का हिस्सा हैं और त्योहारों तथा विशेष अवसरों पर गांव पहुंचकर परिवार के साथ समय बिताते हैं।
इंडियन आइडल के मंच तक पहुंचा परिवार का हुनर
छठु सिंह परिवार की पहचान सिर्फ उसकी एकता और संयुक्त परिवार की परंपरा तक सीमित नहीं है। परिवार ने कला के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई है। परिवार के गायक शिवम सिंह ने टीवी के चर्चित संगीत कार्यक्रम इंडियन आइडल सीजन-13 में टॉप-5 तक पहुंचकर परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया। वर्तमान में शिवम सिंह देश-विदेश में अपनी गायकी के माध्यम से पहचान बना रहे हैं।
बदलते दौर में नई पीढ़ी के लिए संदेश
मोबाइल, सोशल मीडिया और तेजी से बदलती जीवनशैली के दौर में जहां युवा पीढ़ी का झुकाव एकल परिवार की ओर बढ़ रहा है, वहीं ककढ़िया गांव का यह परिवार आज भी सामूहिक जीवन की परंपरा को मजबूती से निभा रहा है। ग्रामीण इसे ‘अजूबा परिवार’ तक कहते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि स्व. छठु सिंह द्वारा दिए गए संस्कार और पारिवारिक अनुशासन ही इस परिवार की सबसे बड़ी पूंजी हैं। 108 वर्षों की इस परंपरा ने यह साबित किया है कि परिवार की ताकत केवल संख्या में नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, सहयोग, संस्कार और एकता में होती है।
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