नाग पंचमी पर रामयादि बाबा मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने किया दूध-लावा का अभिषेक
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सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: मांझी प्रखंड के रसीदपुर स्थित ऐतिहासिक रामयादि बाबा मंदिर परिसर में नाग पंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और बाबा की पिंडी पर दूध एवं लावा अर्पित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में स्थित पीपल के पेड़ के नीचे भी पूजा कर सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की।
बताया जाता है कि रामयादि बाबा मंदिर की स्थापना करीब डेढ़ सौ वर्ष पूर्व की गई थी। नाग पंचमी के अवसर पर यहां आयोजित होने वाला धार्मिक आयोजन वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की कतार लगने लगी और पूरे परिसर में पूजा-पाठ एवं धार्मिक गतिविधियों का माहौल बना रहा।
मेले में उमड़ी भीड़, झूला बना आकर्षण का केंद्र
नाग पंचमी के अवसर पर मंदिर के आसपास मेले का भी आयोजन किया गया है। मेले में चाट, छोले, पकौड़े, जलेबी तथा विभिन्न प्रकार के सौंदर्य प्रसाधनों की दुकानों पर लोगों की भीड़ देखी गई। बच्चों और युवाओं के लिए लगाए गए झूले मेले का विशेष आकर्षण बने हुए हैं। परिवार के साथ पहुंचे लोगों ने पूजा-अर्चना के साथ मेले का भी आनंद लिया।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा एवं भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। पुलिसकर्मी मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में लगातार निगरानी करते नजर आए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो और आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जा सके।
सर्पदंश से जुड़ी है अनोखी लोकमान्यता
रामयादि बाबा मंदिर को लेकर क्षेत्र में एक पुरानी लोकमान्यता भी प्रचलित है। ग्रामीणों के अनुसार, दशकों से ऐसी मान्यता चली आ रही है कि सर्पदंश से अचेत व्यक्ति को श्रद्धा के साथ मंदिर परिसर में लाकर लिटाने से वह ठीक हो जाता है। गांव के बुजुर्ग पृथ्वीनाथ शर्मा बताते हैं कि यहां के जानकार लोग पीपल के पत्ते का इस्तेमाल कर पारंपरिक तरीके से सर्पदंश से प्रभावित व्यक्ति के शरीर में मौजूद विष को खत्म करने का दावा करते हैं।
हालांकि, सर्पदंश की स्थिति में अस्पताल पहुंचने में देरी करना बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसी लोकमान्यताओं के बावजूद पीड़ित को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाकर चिकित्सकीय उपचार दिलाना ही सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीका है। मंदिर से जुड़ी ये बातें स्थानीय आस्था और लोकविश्वास का हिस्सा हैं, इनका चिकित्सकीय उपचार के विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
नाग पंचमी के अवसर पर रामयादि बाबा मंदिर में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर इस प्राचीन धार्मिक स्थल के प्रति लोगों की गहरी आस्था को सामने ला दिया। पूजा-अर्चना के साथ मेले में दिनभर श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रही।
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