प्रधानमंत्री जी की ’’टीबी मुक्त भारत’’ के संकल्प को पूरा करने में बिहार निभाएगा अग्रणी भूमिका
टीबी मुक्त भारत अभियान अब बनेगा जन- आंदोलन, युवाओं की भागीदारी से बिहार में मिटेगा टीबी का नामोनिशानः मंगल पाण्डेय
जेपी नड्डा जी की अंतर-मंत्रालयी पहल का पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने किया स्वागत
पटना (बिहार): 08 जुलाई 2026
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा जी द्वारा टीबी उन्मूलन को लेकर बुलाई गई हाई लेवल बैठक के निर्णयों का स्वागत किया है। देश से टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए युवाओं, मेडिकल छात्रों, एनसीसी कैडेट्स और रक्षा कर्मियों को इस अभियान से जोड़ना एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने हमेशा देश के युवाओं की शक्ति पर भरोसा जताया है। मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी के ऊर्जावान नेतृत्व में बिहार का स्वास्थ्य विभाग पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है। केंद्र सरकार की ’’टीबी मुक्त भारत टोली मॉडल’’ और ’’लीड निक्षय मित्र प्रशिक्षण कार्यक्रम’’ को बिहार में पूरी ताकत के साथ धरातल पर उतारा जा रहा है, जिससे राज्य में टीबी के मामलों में तेजी से गिरावट आ रही है।
श्री पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में ’’टीबी मुक्त भारत अभियान’’ को एक सरकारी कार्यक्रम से ऊपर उठाकर अब एक राष्ट्रव्यापी ’’जन-आंदोलन’’ का रूप दिया जा रहा है, जो बेहद सराहनीय है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जेपी नड्डा जी की प्रशंसा करते हुए पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि नड्डा जी की दूरदर्शी सोच के कारण ही आज स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ-साथ युवा कार्यक्रम, श्रम एवं रोजगार और रक्षा मंत्रालय मिलकर इस राष्ट्रीय मिशन में एकजुट हुए हैं। स्वयंसेवकों और एनसीसी कैडेट्स की भागीदारी बढ़ने से गांवों और शहरों के अंतिम व्यक्ति तक टीबी जांच और जागरूकता की पहुंच सुनिश्चित होगी।
श्री पांडेय ने बिहार में टीबी उन्मूलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि राज्य में पूर्व से ही टीबी के खिलाफ व्यापक स्तर पर कार्य किए गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में उनके स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए राज्य में निक्षय पोषण योजना के तहत डीबीटी के माध्यम से मरीजों को पौष्टिक आहार के लिए सीधे बैंक खाते में सहायता राशि भेजने की व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया था। साथ ही, ’’टीबी हारेगा, देश जीतेगा’’ अभियान के तहत पंचायतों और वार्ड स्तर तक एक्टिव केस फाइंडिंग चलाकर हजारों मरीजों की पहचान की गई और उन्हें मुफ्त दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। बिहार के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को जो मजबूती मिली, उसी का नतीजा है कि आज सूबे के सुदूर ग्रामीण इलाकों में भी टीबी की अत्याधुनिक जांच मशीनें उपलब्ध हैं।

