सक्षम स्थापना दिवस एवं महाकवि सूरदास जयंती पर दिव्यांगजनों के सम्मान और समावेशी समाज का दिया गया संदेश
गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) | 12 जुलाई 2026
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुसांगिक संगठन सक्षम, गाजियाबाद के तत्वावधान में सक्षम स्थापना दिवस एवं महाकवि सूरदास जयंती का आयोजन के.डी.एस. सरस्वती विद्या मंदिर, राजनगर में श्रद्धा, गरिमा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में दिव्यांगजनों के सम्मान, समान अवसर, आत्मनिर्भरता तथा समावेशी समाज के निर्माण का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में सक्षम गाजियाबाद की सचिव श्रीमती मंजु गुप्ता, सह सचिव श्री आशुतोष, पूर्णकालिक कार्यकर्ता श्री आशुतोष (मेरठ), के.डी.एस. सरस्वती विद्या मंदिर की उप-प्रधानाचार्या श्रीमती प्रियंका शर्मा, समाधान संस्था की प्रमुख श्रीमती अर्चना अग्निहोत्री, मेरठ प्रांत के उपाध्यक्ष डॉ. वी.पी. साह सहित अनेक गणमान्य अतिथियों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्वयंसेवकों ने भाग लिया। इसके अलावा इंस्टीट्यूट ऑफ रिहैबिलिटेशन, गाजियाबाद के 30 से अधिक दिव्यांग बच्चों तथा उनके विशेष शिक्षकों श्रीमती विमला, श्री आदेश और श्री रवि शंकर की सहभागिता कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही। बच्चों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और उत्साह ने सभी उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने महाकवि सूरदास के जीवन और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शारीरिक सीमाएं कभी भी व्यक्ति की प्रतिभा, संकल्प और उपलब्धियों में बाधा नहीं बन सकतीं। उन्होंने कहा कि सक्षम का उद्देश्य दिव्यांगजनों के प्रति समाज में सम्मान, संवेदनशीलता और सहयोग की भावना विकसित करते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना है।
सक्षम गाजियाबाद की सचिव श्रीमती मंजु गुप्ता ने स्वागत भाषण में कहा कि सक्षम का स्थापना दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व के संकल्प को और मजबूत करने का दिन है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगता किसी व्यक्ति की क्षमता की सीमा नहीं है। उचित अवसर, सहयोग और सकारात्मक सोच के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति अपनी प्रतिभा का श्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकता है।
उन्होंने महाकवि सूरदास को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि दृष्टिबाधित होने के बावजूद उन्होंने अपनी भक्ति और साहित्य से भारतीय संस्कृति को अमूल्य धरोहर प्रदान की। उनका जीवन यह संदेश देता है कि दृढ़ संकल्प, आस्था और कर्मनिष्ठा के बल पर कोई भी बाधा सफलता के मार्ग में रुकावट नहीं बन सकती।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने दिव्यांगजनों के सम्मान, अधिकार, स्वावलंबन और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य करने तथा समावेशी, संवेदनशील एवं सक्षम भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का सामूहिक संकल्प लिया।
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