महापंडित राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा तोड़े जाने पर रोष, दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: बिहार विधान परिषद के सदस्य एवं सहकारी आवासन समिति के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) वीरेन्द्र नारायण यादव की अध्यक्षता में रविवार को स्थानीय शहर स्थित आवास पर आयोजित बैठक में पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले के रानीगंज-कोयलांचल क्षेत्र में महापंडित राहुल सांकृत्यायन की नौ फीट ऊंची प्रतिमा को असामाजिक तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना की कड़ी निंदा की गई। बैठक में इसे भारतीय ज्ञान, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत पर सीधा हमला बताते हुए दोषियों की अविलंब गिरफ्तारी एवं उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रो. (डॉ.) वीरेन्द्र नारायण यादव ने कहा कि महापंडित राहुल सांकृत्यायन का सारण जिले से गहरा एवं आत्मीय संबंध रहा है। उन्होंने सारण को अपनी कर्मभूमि बनाया तथा अमनौर किसान आंदोलन सहित अनेक जन आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। स्वतंत्रता संग्राम में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा और उन्होंने देश की आजादी के लिए जेल यात्रा तक की। उन्होंने कहा कि राहुल सांकृत्यायन केवल महान साहित्यकार ही नहीं, बल्कि प्रख्यात चिंतक, इतिहासकार, दार्शनिक और समाज सुधारक भी थे, जिन्होंने हिंदी एवं भोजपुरी साहित्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
प्रो. यादव ने कहा कि महापंडित राहुल सांकृत्यायन की रचनाएं आज भी समाज को नई सोच और सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देती हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में 'मेरे असहयोग के साथी', 'मैं जिनका कृतज्ञ', 'मेरी जीवन यात्रा' तथा 'भागो नहीं, दुनिया को बदलो' जैसी कालजयी पुस्तकें शामिल हैं। साहित्य, इतिहास और समाज के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया।
बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि सारण जिले के लोगों की लंबे समय से यह मांग रही है कि जिले में महापंडित राहुल सांकृत्यायन की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए, ताकि नई पीढ़ी उनके व्यक्तित्व, विचारों और कृतित्व से प्रेरणा प्राप्त कर सके। वक्ताओं ने कहा कि महान विभूतियों का सम्मान और उनकी स्मृतियों का संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बैठक में प्रो. लक्ष्मीधर राय, डॉ. श्यामशरण, डॉ. नागेंद्र राय, बृजनाथ राय, डॉ. अनिल कुमार, विकास कुमार, मिर्जा मुन्ना, प्रो. उदय शंकर ओझा, प्रो. जयराम सिंह, प्रो. अरविंद कुमार सहित अनेक शिक्षाविद, बुद्धिजीवी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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