अरवल में सिविल सर्जन पर हमले के विरोध में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ सख्त, 22 जुलाई को ओपीडी बहिष्कार की चेतावनी
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: अरवल सदर अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद सिविल सर्जन पर हुए हमले के विरोध में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। संघ के महासचिव डॉ. रोहित कुमार ने बताया कि इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि 21 जुलाई 2026 तक दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो 22 जुलाई को पूरे बिहार में सरकारी चिकित्सक ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार करेंगे। हालांकि आपातकालीन एवं इमरजेंसी सेवाएं पूर्ववत संचालित होती रहेंगी।
मांझी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (एमओआईसी) डॉ. रोहित कुमार ने बताया कि अरवल सदर अस्पताल में एक प्रसूता की सिजेरियन ऑपरेशन के बाद उत्पन्न चिकित्सीय जटिलताओं के कारण मृत्यु हो गई थी। चिकित्सकों ने मरीज को बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद कुछ असामाजिक तत्वों ने कथित रूप से राजनीतिक संरक्षण में अस्पताल परिसर में हंगामा किया तथा सिविल सर्जन पर पीछे से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य अधिकारियों पर इस प्रकार की हिंसा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। किसी मरीज की मृत्यु या प्रतिकूल चिकित्सीय परिणाम को हिंसा का आधार बनाना कानून के शासन के विरुद्ध है और इससे स्वास्थ्य सेवाओं का वातावरण प्रभावित होता है।
बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने राज्य सरकार के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें 24 घंटे के भीतर सभी आरोपितों की पहचान कर गिरफ्तारी, सीसीटीवी फुटेज एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर त्वरित कार्रवाई, दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई तथा राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करना शामिल है। संघ ने अस्पतालों में हिंसा की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी सुरक्षा प्रोटोकॉल और त्वरित पुलिस हस्तक्षेप व्यवस्था लागू करने की भी मांग की है।
डॉ. रोहित कुमार ने कहा कि चिकित्सकों की सुरक्षा केवल डॉक्टरों का ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था का विषय है। यदि स्वास्थ्यकर्मी स्वयं सुरक्षित नहीं होंगे तो आम जनता को गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना कठिन हो जाएगा। उन्होंने राज्य सरकार से मामले में शीघ्र एवं निर्णायक कार्रवाई करते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कदम उठाने की अपील की।
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