रचनाकार भारत फाउंडेशन की भाषण प्रतियोगिता में प्रेमचंद के साहित्य पर विद्यार्थियों ने रखे प्रभावी विचार, रानी कुमारी महतो रहीं प्रथम
अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक संस्था रचनाकार भारत फाउंडेशन द्वारा आयोजित भाषण प्रतियोगिता श्रृंखला की तीसरी कड़ी का सफल आयोजन रविवार को संपन्न हुआ। प्रतियोगिता का विषय "21वीं सदी में प्रेमचंद के साहित्य की प्रासंगिकता" रखा गया, जिसमें विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था की अध्यक्ष रचना सरन ने सभी प्रतिभागियों, निर्णायकों एवं उपस्थित श्रोताओं का स्वागत करते हुए किया। उन्होंने प्रतियोगिता के उद्देश्य तथा मूल्यांकन के मानकों की जानकारी दी। कार्यक्रम का संयुक्त संचालन संस्था के मीडिया प्रभारी सुरेंद्र सिंह एवं शिक्षिका प्रिया श्रीवास्तव ने किया।
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में रेलवे अधिकारी ब्रजेश कुमार त्रिपाठी, शिक्षक विवेक लाल, व्याख्याता एवं शिक्षाविद डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी, कवयित्री प्रिया श्रीवास्तव तथा संस्था अध्यक्ष रचना सरन शामिल रहीं। प्रतियोगिता के समापन पर निर्णायकों ने प्रेमचंद के साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए। डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी ने प्रतिभागियों के प्रस्तुतीकरण की खूबियों और सुधार के बिंदुओं पर प्रकाश डाला, जबकि ब्रजेश कुमार त्रिपाठी ने वर्तमान सामाजिक परिवेश में प्रेमचंद के साहित्य की आवश्यकता को रेखांकित किया। शिक्षक विवेक लाल ने ऐसे साहित्यिक आयोजनों को विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। वहीं नुपुर श्रीवास्तव ने विषय से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए रानी कुमारी महतो ने प्रथम, सुमन कुमारी राम ने द्वितीय तथा वर्षा सिंह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को सम्मानित करते हुए आयोजकों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम के विशेष अतिथि युगांडा से आए विश्व प्रसिद्ध कवि एवं रचनाकार भारत फाउंडेशन के विदेश विभाग के प्रभारी अजय गोयल रहे। संस्था के संस्थापक सभापति सुरेश चौधरी एवं सदस्यों ने उनका मुक्ताहार, स्मृति चिह्न एवं दुपट्टा भेंट कर स्वागत किया। अजय गोयल ने अपने कर-कमलों से विजेताओं को पुरस्कार एवं सभी प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न तथा सहभागिता प्रमाणपत्र प्रदान किए। कार्यक्रम के अंत में उनके मधुर गीतों ने उपस्थित साहित्यप्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
संस्था ने जानकारी दी कि यह भाषण प्रतियोगिता प्रत्येक माह आयोजित की जाती है और इसमें 16 वर्ष से अधिक आयु के विद्यार्थी भाग ले सकते हैं। पूरे आयोजन का सफल संयोजन विनोद यादव ने किया। कार्यक्रम को प्रतिभागियों, शिक्षकों और साहित्यप्रेमियों ने अत्यंत सराहा तथा इसे साहित्यिक चेतना को बढ़ावा देने की दिशा में एक सार्थक पहल बताया।
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