शुरू हुई आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, 23 जुलाई तक चलेगी विशेष साधना
जानिए महत्व, घटस्थापना मुहूर्त और पूजन विधि
✍️धर्मेंद्र रस्तोगी
हिंदू धर्म में एक साल के अंदर चार नवरात्रि मनाई जाती हैं, जिनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं। वहीं आषाढ़ और माघ माह में आने वाली गुप्त नवरात्रि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि बुधवार, 15 जुलाई 2026 से प्रारंभ होकर 23 जुलाई 2026 तक चलेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह नौ दिनों का पर्व विशेष रूप से साधना, तप, आत्मचिंतन और देवी उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
गुप्त नवरात्रि सामान्य नवरात्रि से अलग मानी जाती है। इस दौरान सार्वजनिक स्तर पर बड़े आयोजन अपेक्षाकृत कम होते हैं और साधक गोपनीय रूप से मां आदिशक्ति की आराधना करते हैं। मान्यता है कि इन दिनों श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा, मंत्र जाप तथा साधना से विशेष आध्यात्मिक लाभ और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई 2026 को सुबह 11:42 बजे प्रारंभ होकर 15 जुलाई को सुबह 8:20 बजे तक रहेगी। इसी अवधि में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 15 जुलाई को सुबह 6:03 बजे से 8:20 बजे तक रहेगा। लगभग 2 घंटे 17 मिनट की इस अवधि को कलश स्थापना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ- साथ दस महाविद्याओं की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। इनमें मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की आराधना की जाती है। शाक्त परंपरा में इन महाविद्याओं को देवी शक्ति के विभिन्न स्वरूप माना गया है, जिनकी साधना से आध्यात्मिक उन्नति और विशेष सिद्धियों की प्राप्ति का उल्लेख मिलता है।
पूजन विधि के अनुसार प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर देवी का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। यदि कलश स्थापना की जा रही हो तो विधि- विधान से कलश स्थापित कर अखंड दीप प्रज्वलित करें। सुबह और शाम घी का दीपक जलाकर "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाय विच्चे" मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना गया है। साथ ही दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा और देवी की आरती का पाठ करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी को लाल पुष्प, लौंग और बताशे का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। वहीं आक, मदार, दूब और तुलसी अर्पित नहीं करनी चाहिए। पूरे नवरात्रि में सात्विक भोजन, ब्रह्मचर्य, संयमित दिनचर्या तथा सकारात्मक विचार अपनाने की सलाह दी जाती है।
धर्मग्रंथों और शाक्त परंपरा में गुप्त नवरात्रि को विशेष साधना काल माना गया है। कहा जाता है कि इस दौरान की गई उपासना, मंत्र जाप और तपस्या का फल शीघ्र प्राप्त होता है। मान्यता यह भी है कि जितनी गोपनीयता और एकाग्रता के साथ साधना की जाती है, उतना ही अधिक उसका आध्यात्मिक प्रभाव माना जाता है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार गुप्त नवरात्रि केवल इच्छापूर्ति का ही नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का भी पर्व है। इसलिए श्रद्धालुओं से आग्रह किया जाता है कि वे पूरे श्रद्धा, विश्वास और विधि-विधान के साथ मां आदिशक्ति की आराधना कर जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की कामना करें।

