भारत का पहला 'सिंदूर ग्राम' बना रामासी, बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने गोद लेकर रचा इतिहास
भागलपुर, 18 जुलाई 2026
बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने भागलपुर जिले के रामासी गांव को भारत का पहला "सिंदूर ग्राम" घोषित करते हुए उसे गोद लेने की ऐतिहासिक पहल की है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका, जैविक कृषि और प्राकृतिक सिंदूर उत्पादन को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम का नेतृत्व विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने किया, जिसमें जनप्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों, महिला किसानों एवं ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सन्हौला विधायक सुभानंद मुकेश तथा रामासी पंचायत की मुखिया शोभा देवी रहे। इस अवसर पर एक एकड़ भूमि में 250 सीता सिंदूर पौधों का रोपण किया गया, जबकि 100 महिला किसानों के बीच सिंदूर के पौधों का वितरण किया गया। किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण, हॉर्टिकल्चर टूल किट, पावर नैपसैक स्प्रेयर एवं स्वीपिंग मशीन भी उपलब्ध कराई गई।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. रवि केशरी ने सीता सिंदूर के धार्मिक, सांस्कृतिक और औद्योगिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह केवल सुहाग का प्रतीक नहीं, बल्कि प्राकृतिक रंग एवं विभिन्न उद्योगों में उपयोग होने वाला महत्वपूर्ण उत्पाद भी है। वहीं डॉ. श्वेता सम्भावी ने भारतीय संस्कृति में सिंदूर के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया।
डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि सिंदूर की वैज्ञानिक खेती से ग्रामीणों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर खुलेंगे। डॉ. एस. के. पाठक ने किसानों से जैविक खेती अपनाने का आग्रह किया, जबकि डॉ. फेज़ा अहमद ने बताया कि विश्वविद्यालय उच्च गुणवत्ता वाली सिंदूर किस्मों के विकास तथा टिशू कल्चर तकनीक से बड़े पैमाने पर पौध उत्पादन पर कार्य कर रहा है।
अनुसंधान निदेशक डॉ. ए. के. सिंह ने कहा कि यदि किसान एवं महिला स्वयं सहायता समूह सिंदूर से प्राकृतिक बिक्सिन (Bixin) तैयार करेंगे, तो विश्वविद्यालय का स्टार्टअप सेल उन्हें ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन में हरसंभव सहयोग देगा।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने घोषणा की कि अब रामासी गांव पूरे देश में "सिंदूर ग्राम" के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने सिंदूर प्रौद्योगिकी का पेटेंट तथा सीता सिंदूर का जीआई टैग प्राप्त कर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जाएगा तथा गांव में सिंदूर प्रसंस्करण इकाई स्थापित कर बीज से शुद्ध सिंदूर पाउडर तैयार किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि एनाट्टो (Annatto) का उपयोग अमूल सहित खाद्य उद्योगों में प्राकृतिक रंग के रूप में किया जाता है, जबकि बिक्सिन ऑयल का उपयोग विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापक रूप से होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में रामासी गांव देश का प्रमुख जैविक सिंदूर उत्पादन केंद्र बनेगा और प्रमुख मंदिरों एवं धार्मिक संस्थानों से जुड़कर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
कुलपति ने भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि रामासी में सिंदूर नर्सरी, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन, बकरी पालन और कुक्कुट पालन जैसी एकीकृत ग्रामीण विकास गतिविधियां शुरू की जाएंगी। साथ ही बिहार कृषि विश्वविद्यालय जल्द ही जरदालू ग्राम, कमलम ग्राम तथा दानापुर में विश्व का पहला सिंदूर पार्क विकसित करने की दिशा में भी कार्य करेगा।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन देते हुए डॉ. आर. एन. सिंह ने कहा कि जिस प्रकार विश्वविद्यालय ने पूर्व में कुपोषण उन्मूलन अभियान में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की थी, उसी प्रकार "सिंदूर ग्राम रामासी" भी ग्रामीण समृद्धि, महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन का राष्ट्रीय मॉडल बनेगा।
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