टीबी उन्मूलन अभियान को मिले नए साथी, 67 लैब तकनीशियनों को एक्स-रे मशीन और निक्षय पोर्टल का प्रशिक्षण
पटना (बिहार): टीबी मुक्त भारत अभियान को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार द्वारा शेखपुरा स्थित स्वास्थ्य भवन के सभागार में नवनियुक्त लैब तकनीशियनों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में 76 में से 67 नवनियुक्त लैब तकनीशियनों को अल्ट्रा पोर्टेबल हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीन के संचालन तथा निक्षय पोर्टल पर मरीजों का विवरण दर्ज करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण दो चरणों में आयोजित किया गया। पहले चरण में 7 जुलाई को 31 तथा दूसरे चरण में 8 जुलाई को 36 लैब तकनीशियनों को प्रशिक्षित किया गया। ये सभी तकनीशियन अनिक्रा फाउंडेशन एवं एवरराइज फाउंडेशन के माध्यम से टीबी उन्मूलन अभियान में नियुक्त किए गए हैं और राज्यभर में संभावित टीबी मरीजों की जांच का कार्य करेंगे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन अपर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार डॉ. अनुपमा सिंह तथा अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी (यक्ष्मा) डॉ. बाल कृष्ण मिश्र की अध्यक्षता एवं निगरानी में किया गया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. अनुपमा सिंह ने कहा कि सभी जांच रिपोर्टों को निक्षय पोर्टल पर समयबद्ध तरीके से अपलोड करना अनिवार्य है। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक तकनीशियन प्रतिदिन अल्ट्रा पोर्टेबल हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीन से 50 से 100 संभावित टीबी मरीजों की जांच सुनिश्चित करें। उन्होंने मशीनों की उपयोगिता, उपलब्धता और प्रभावी संचालन पर भी विस्तार से चर्चा की।
वहीं डॉ. बाल कृष्ण मिश्र ने संभावित टीबी मरीजों की गुणवत्तापूर्ण जांच, मशीनों के सही रखरखाव तथा समय पर रिपोर्ट अपलोड करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित तकनीशियन टीबी नियंत्रण अभियान की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
प्रशिक्षण के बाद सभी लैब तकनीशियन अल्ट्रा पोर्टेबल हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीन के माध्यम से संभावित यक्ष्मा मरीजों की जांच करेंगे और उनकी रिपोर्ट निक्षय पोर्टल पर अपलोड करेंगे। वर्तमान में बिहार में 140 अल्ट्रा पोर्टेबल हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीनों के माध्यम से संभावित टीबी मरीजों की जांच की जा रही है। इन मशीनों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि दूर-दराज एवं उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जांच अब उनके गांव में ही संभव हो सकेगी, जिससे टीबी की शीघ्र पहचान और उपचार सुनिश्चित होगा।
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