विश्व हिन्दी परिषद की अंतरराष्ट्रीय काव्य गोष्ठी में गूंजी हिंदी, नारी शक्ति और विश्व शांति की स्वर-लहरियां
28 जून 2026 | लखनऊ/नई दिल्ली
विश्व हिन्दी परिषद के तत्वावधान में शनिवार को आयोजित अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल काव्य गोष्ठी में भारत सहित अमेरिका, कनाडा, नीदरलैंड, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कतर, कुवैत और अन्य देशों के साहित्यकारों ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं से हिंदी भाषा, नारी शक्ति, पर्यावरण संरक्षण और विश्व शांति का संदेश दिया। भारतीय समयानुसार रात्रि 8 बजे शुरू हुई यह गोष्ठी दो घंटे से अधिक समय तक चली और इसमें देश-विदेश के साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ अमेरिका से जुड़ीं श्रीमती कादम्बरी शंकर 'आदेश' की सरस्वती वंदना से हुआ। उन्होंने मां के विविध स्वरूपों का भावपूर्ण वर्णन किया। इसके बाद नीदरलैंड से डॉ. ऋतु 'ननन' पांडे ने पिता के संघर्ष और त्याग पर आधारित कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावुक कर दिया। कनाडा से डॉ. स्नेहा ठाकुर ने नारी शक्ति पर अपनी सशक्त अभिव्यक्ति देते हुए कहा कि "नारी हूँ, पुरुष और पुरुषार्थ को जन्म देती हूँ।" वहीं चीन से डॉ. विवेक मणि त्रिपाठी ने नारी की तुलना समुद्र की लहरों से करते हुए उसके संघर्ष और निरंतर प्रवाह का प्रभावशाली चित्रण किया।
प्रख्यात साहित्यकार श्री मृदुल कीर्ति ने 'नारी और धरती' के संबंध को रेखांकित करते हुए नारी को रत्नगर्भा और सृजन की आधारशिला बताया। इंदौर से डॉ. अशोक भार्गव ने अपनी कविता 'मेरी अलौकिक भाषा हिन्दी' के माध्यम से हिंदी की वैश्विक पहचान को रेखांकित करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि हिंदी शीघ्र ही विश्व की अग्रणी भाषा बनेगी। अमेरिका से विश्व हिन्दी परिषद की मनोनीत अध्यक्ष डॉ. दुर्गा सिन्हा 'उदार' ने विश्व शांति पर आधारित अपनी कविता में युद्ध और आतंक से मुक्त विश्व की कल्पना प्रस्तुत करते हुए प्रेम, भाईचारे और शास्त्रों की आवश्यकता पर बल दिया।
नागपुर से कृष्ण कुमार द्विवेदी ने प्रेरणादायक कविता "मिलेगी मंज़िल मगर धीरे-धीरे" सुनाई, जबकि इटावा से प्रशांत ने हिंदी भाषा के महत्व पर अपने विचार रखे। समयाभाव के बावजूद उड़ीसा, कुवैत, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, असम, बिहार, हरियाणा और उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों एवं देशों से जुड़े साहित्यकारों ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा और सामाजिक सरोकारों को अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व हिन्दी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार ने की। उन्होंने सभी रचनाकारों की सराहना करते हुए विश्वभर में बच्चों को हिंदी भाषा से जोड़ने तथा परिषद के आगामी साहित्यिक आयोजनों की जानकारी दी। कार्यक्रम का सफल संचालन राष्ट्रीय संपर्क समन्वयक डॉ. नन्दकिशोर साह ने किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को मंच प्रदान करते हुए कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया। अंत में सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अंतरराष्ट्रीय काव्य गोष्ठी का विधिवत समापन किया गया।
विश्व हिन्दी परिषद, अंतरराष्ट्रीय काव्य गोष्ठी, हिंदी भाषा, विश्व शांति, नारी शक्ति, डॉ विपिन कुमार, डॉ नन्दकिशोर साह, डॉ दुर्गा सिन्हा उदार, अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन, हिंदी साहित्य समाचार

