19वें चिरांद चेतना महोत्सव में विश्व पटल पर उभरेगी चिरांद की प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: गंगा, सरयू एवं सोन नदियों के पावन त्रिवेणी संगम तट पर स्थित विश्व प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल चिरांद एक बार फिर अपनी हजारों वर्ष पुरानी गौरवशाली सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाने जा रहा है। 19वें चिरांद चेतना महोत्सव सह गंगा गरिमा रक्षा संकल्प समारोह के दौरान चिरांद की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक धरोहर को विश्व मंच पर प्रस्तुत करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
चिरांद विकास परिषद के अध्यक्ष कृष्ण कांत ओझा ने बताया कि महोत्सव के दौरान पुरातात्विक स्थल परिसर स्थित भवन में विशेष चित्र एवं शोध प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। इस प्रदर्शनी में चिरांद की प्राचीन सभ्यता, कृषि संस्कृति, नदी आधारित जीवन प्रणाली तथा भारतीय संस्कृति के सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) मॉडल को चित्रों एवं शोध सामग्री के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य आगंतुकों को यह बताना है कि हजारों वर्ष पूर्व भी भारतीय सभ्यता प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित कर विकास की अवधारणा पर आधारित थी, जो आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह आयोजन चिरांद को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
चिरांद विकास परिषद के सचिव श्रीराम तिवारी ने कहा कि चिरांद केवल एक पुरातात्विक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और पर्यावरण संरक्षण की जीवंत धरोहर है। महोत्सव के माध्यम से युवाओं, शोधकर्ताओं, इतिहास प्रेमियों एवं विद्यार्थियों को इस समृद्ध विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी अपने गौरवशाली अतीत को समझ सके।
उन्होंने बताया कि वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम, लक्ष्मण एवं महर्षि विश्वामित्र जनकपुर की यात्रा के दौरान गंगा, सरयू और सोन के त्रिवेणी संगम स्थित चिरांद क्षेत्र में रात्रि विश्राम के लिए रुके थे। इसी ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को देखते हुए चिरांद को 'राम अभ्युदय यात्रा केंद्र' के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी महोत्सव के दौरान रखा जाएगा।
महोत्सव के आयोजकों ने क्षेत्र के नागरिकों, इतिहासकारों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों एवं श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर चिरांद की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा गंगा गरिमा रक्षा के संकल्प को मजबूत बनाने की अपील की है। इस अवसर पर चिरांद विकास परिषद के अध्यक्ष कृष्ण कांत ओझा, सचिव श्रीराम तिवारी, देवेशनाथ दीक्षित, राजेश कुमार पाण्डेय सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
चिरांद चेतना महोत्सव, Chirand Mahotsav, Chirand Archaeological Site, Chhapra News, Bihar Heritage, Ganga Garima Sankalp, Ancient Civilization, Ram Abhyuday Yatra Kendra, Chirand Development Council

