पति की दीर्घायु के लिए सुहागिन महिलाओं ने रखा वट सावित्री व्रत, घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: माँझी प्रखंड के प्रसिद्ध रामघाट सहित डूमाईगढ़ घाट, ताजपुर घाट, मटियार घाट और जई छपरा घाट पर शनिवार को वट सावित्री पूजा श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक उत्साह के साथ संपन्न हुई। सुबह से ही बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाएं विभिन्न घाटों पर पहुंचने लगीं। कई महिलाओं ने पवित्र सरयू नदी में स्नान कर पूजा-अर्चना की, जबकि कई महिलाएं सोलह श्रृंगार कर घरों से सीधे घाटों पर पहुंचीं।
महिलाओं ने पूजा की थाली, फल-फूल और प्रसाद के साथ बरगद के वृक्ष की विधि-विधान से पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। पूरे रामघाट परिसर में दिनभर भक्तिमय माहौल बना रहा। व्रती महिलाओं ने बरगद के पेड़ में मौली धागा बांधकर उसकी परिक्रमा की तथा सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी। पूजा-पाठ और परिक्रमा का क्रम देर दोपहर तक चलता रहा। घाटों पर महिलाओं की भारी भीड़ के कारण मेले जैसा दृश्य देखने को मिला।
रीना देवी, पूनम देवी, सुनीता देवी, ममता देवी, आशा देवी, रिंकू भारतीय, पूजा देवी, सुनैना देवी, अक्षरा सिंह और किरण देवी समेत बड़ी संख्या में महिलाओं ने पूरे विधि-विधान के साथ व्रत रखा। पूजा के उपरांत महिलाओं ने अपने पति के चरण स्पर्श कर प्रसाद अर्पित किया और अखंड सौभाग्य की कामना की।
नगर पंचायत एकमा बाजार, दाउदपुर बाजार तथा आसपास के गांवों में भी महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी आयु एवं परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की। वहीं ताजपुर सती स्थान तथा सलेमपुर स्थित प्रसिद्ध कर्पूर ब्रह्म बाबा स्थान पर भी व्रती महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी रही।
पंडित धनंजय दुबे ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, त्याग और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। उसी परंपरा और आस्था के तहत आज भी सुहागिन महिलाएं वट सावित्री व्रत रखती हैं। प्रखंड के विभिन्न घाटों पर महिलाओं की श्रद्धा, उत्साह और पूजा-अर्चना का दृश्य दिनभर लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।

