नक्सल प्रभावित गांव से अमेरिका तक का सफर, सारण के नीरज ने यूपेन में रचा इतिहास
सारण (बिहार) संवाददाता धर्मेंद्र रस्तोगी: पानापुर प्रखंड के दियारा क्षेत्र स्थित पकड़ी नारोतम गांव के होनहार युवा नीरज कुमार सिंह ने अमेरिका के प्रतिष्ठित पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय में ऐतिहासिक सफलता हासिल कर पूरे बिहार का मान बढ़ाया है। कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचान रखने वाले इस गांव से निकलकर नीरज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
प्रमोद सिंह एवं गीता देवी के पुत्र नीरज कुमार सिंह ने पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के 270वें दीक्षांत समारोह में पेन ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन (Penn GSE) से इंटरनेशनल एजुकेशनल डेवलपमेंट विषय में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री प्राप्त की है। ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों के बीच संघर्ष करते हुए हासिल की गई यह सफलता पूरे सारण और बिहार के लिए गर्व का विषय बन गई है।
नीरज कुमार सिंह अपने गांव के प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थियों में शामिल हैं। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा सारण जिले में प्राप्त करने के बाद जय प्रकाश विश्वविद्यालय अंतर्गत जगदम कॉलेज से विज्ञान स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान से सोशल वर्क में स्नातकोत्तर अध्ययन किया। साथ ही टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान तथा राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान से भी पेशेवर प्रशिक्षण प्राप्त किया।
अपने शैक्षणिक एवं सामाजिक कार्यों के दौरान नीरज ने 150 से अधिक सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं के साथ कार्य किया। इनमें यूनिसेफ, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, USAID तथा वर्ल्ड विजन इंटरनेशनल जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं शामिल हैं। यूपेन में अध्ययन के दौरान उन्होंने एडमिशन एम्बेसडर के रूप में विभिन्न देशों के विद्यार्थियों का मार्गदर्शन भी किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने हॉवर्ड विश्वविद्यालय, कोलंबिया विश्वविद्यालय तथा संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कई अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों एवं सम्मेलनों में भाग लिया।
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए पेन जीएसई की डीन कैथरीन ओ. स्ट्रंक ने छात्रों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं, जबकि मुख्य संबोधन डेनिस फोर्टे ने दिया। समारोह के बाद नीरज कुमार सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की है जिन्होंने संघर्ष के हर दौर में उनका साथ दिया। उन्होंने बिहार के ग्रामीण छात्रों से मेहनत, समर्पण और शिक्षा के बल पर बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का संदेश दिया।

