‘तब पतझड़ में भी खिलेगा बसंत’ विषय पर नागपुर में प्रेरक परिचर्चा, महिलाओं ने साझा किए सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण
नागपुर (महाराष्ट्र): नागपुर शहर की प्रतिष्ठित संस्था हिन्दी महिला समिति द्वारा एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता श्रीमती रति चौबे ने की। इस कार्यक्रम में “तब पतझड़ में भी खिलेगा बसंत” जैसे भावनात्मक और प्रेरणादायक विषय पर सखियों ने अपने-अपने अनुभवों और विचारों को अभिव्यक्त किया। परिचर्चा का माहौल साहित्यिक, चिंतनशील और उत्साहवर्धक रहा, जहां जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी आशा, सकारात्मकता और संघर्ष के महत्व पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में गार्गी जोशी ने जीवन के दुखों में भी नई आशा की धुन सुनाई देने की बात कही, वहीं गीतू शर्मा ने प्रकृति के परिवर्तन के साथ जीवन में आने वाले नए उत्साह को बसंत से जोड़ा। माधुरी यादव ने कठिन परिस्थितियों में सकारात्मक सोच बनाए रखने पर बल दिया, जबकि निशा चतुर्वेदी ने जीवन को सुख-दुख के संतुलन का चक्र बताया। रेखा तिवारी और भगवती पंत ने भी अपने विचारों में संघर्ष, धैर्य और सफलता के संबंध को रेखांकित किया।
सुषमा अग्रवाल, रेखा पाण्डेय और निवेदिता पाटनी ने अपने वक्तव्यों में प्रेम, परिवर्तन और आत्मविश्वास के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि जीवन में हर अंधकार के बाद उजाला निश्चित है। वहीं प्रीति खमेले और मंगला भुसारी ने संघर्ष और नई शुरुआत को जीवन का सार बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षा रति चौबे ने सामाजिक कुरीतियों को जीवन का ‘पतझड़’ बताते हुए उनके उन्मूलन पर बल दिया, ताकि समाज में ‘बसंत’ का आगमन हो सके।
कार्यक्रम का सफल संचालन सचिव रश्मि मिश्रा ने किया, जिन्होंने अंत में आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हिम्मत, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ हर कठिनाई को पार कर जीवन में सफलता पाई जा सकती है। ममता विश्वकर्मा ने भी अपने विचारों में आशा और प्रयास को जीवन में बदलाव का आधार बताया।
यह परिचर्चा न केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति का मंच बनी, बल्कि उपस्थित महिलाओं के लिए प्रेरणा और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत भी साबित हुई।
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