घाघरा नदी के बदलते स्वरूप का अध्ययन करने मांझी पहुंची IIT रुड़की की टीम
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: घाघरा नदी के बदलते स्वरूप और उसके पर्यावरणीय प्रभावों के वैज्ञानिक आकलन के लिए आईआईटी रुड़की की विशेषज्ञ टीम गुरुवार को मांझी पहुंची। टीम ने नदी के विभिन्न घाटों और तटीय क्षेत्रों का निरीक्षण कर जल प्रवाह, तट कटाव, मिट्टी की स्थिति तथा आसपास के पर्यावरणीय बदलावों का गहन अध्ययन किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने स्थानीय ग्रामीणों, किसानों और नाविकों से बातचीत कर बीते वर्षों में नदी के स्वभाव में आए परिवर्तनों की जानकारी भी जुटाई।
जानकारी के अनुसार यह अध्ययन घाघरा नदी के पर्यावरणीय आकलन परियोजना के तहत किया जा रहा है। इसमें नदी के जल की गुणवत्ता, जैव विविधता, तटीय कटाव, जलधारा की दिशा और मानव गतिविधियों के प्रभाव का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा। विशेषज्ञ टीम ने नदी किनारे कई स्थानों से पानी और मिट्टी के नमूने भी संग्रहित किए, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा।
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने नदी कटाव, खेती योग्य भूमि के नुकसान और बाढ़ के समय होने वाली समस्याओं को प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया। ग्रामीणों का कहना था कि हर वर्ष नदी का रुख बदलने से गांवों पर खतरा बढ़ता जा रहा है, जिससे किसानों की चिंता गहराती जा रही है।
विशेषज्ञों ने बताया कि अध्ययन की विस्तृत रिपोर्ट तैयार होने के बाद नदी संरक्षण, कटाव नियंत्रण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने को लेकर संबंधित विभागों को आवश्यक सुझाव दिए जाएंगे। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में घाघरा नदी क्षेत्र में विकास, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं को नई दिशा मिल सकती है।


