डॉक्टरों के महासम्मेलन में निजी प्रैक्टिस पर रोक का जोरदार विरोध
सारण (बिहार) संवाददाता वीरेश सिंह: बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) के बैनर तले रविवार को पटना स्थित आईएमए हॉल में राज्यभर से पहुंचे हजारों सरकारी चिकित्सकों का महासम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में बिहार सरकार द्वारा सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के फैसले का चिकित्सकों ने तीखा विरोध जताया। चिकित्सकों ने इसे एकतरफा निर्णय बताते हुए कहा कि सरकार को कोई भी फैसला लेने से पहले संघ के प्रतिनिधियों से व्यापक संवाद करना चाहिए। महासम्मेलन में कार्यस्थल पर सुरक्षा, प्रशासनिक उपेक्षा, सेवा शर्तों तथा स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
सम्मेलन में चिकित्सकों ने कहा कि राज्य के सेवा चिकित्सकों को समुचित आवास, सुरक्षा और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए। अस्पतालों में तोड़फोड़, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों पर हमलों की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए मांग की गई कि बिहार चिकित्सा सेवा संस्थान एवं व्यक्ति सुरक्षा कानून को और प्रभावी बनाया जाए तथा दोषियों के लिए न्यूनतम दस वर्ष के कठोर कारावास का प्रावधान हो। इसके साथ ही अस्पतालों में सशस्त्र सुरक्षा गार्ड की स्थायी तैनाती सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई गई।
महासम्मेलन में स्वास्थ्य निदेशालय के पुनर्गठन, लंबित प्रोन्नति और डीएसीपी लागू करने, ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सकों को विशेष भत्ता देने, चिकित्सकों और उनके परिवारों के लिए 50 लाख रुपये तक का कैशलेस हेल्थ कार्ड जारी करने तथा पोस्टमार्टम एवं इंजरी कार्य के लिए अलग भत्ता देने सहित कुल 20 सूत्री मांग पत्र सरकार को सौंपा गया। चिकित्सकों ने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने और आम जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इन मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के अध्यक्ष डॉ. कैप्टन संजीव कुमार झा, महासचिव डॉ. रोहित कुमार सहित राज्यभर से आए बड़ी संख्या में चिकित्सक उपस्थित रहे। चिकित्सकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आगे आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

