लीची की मिठास के पीछे छिपी है वर्षों की मेहनत और शोध, लीची का मातृ वृक्ष है उसका आधार
✍️धर्मेंद्र रस्तोगी (स्वतंत्र पत्रकार)
भागलपुर की धरती सिर्फ शिक्षा और संस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी मशहूर लीची के लिए भी जानी जाती है और आज हम आपको दिखा रहे हैं, वह खास स्थान, जिसे “लीची का मातृ वृक्ष” कहा जाता है।
यह बोर्ड अलग- अलग नंबरों और किस्मों के माध्यम से यहां मौजूद लीची के पौधों और उनकी प्रजातियों की जानकारी देता है। इनमें देहरादून, चाइना मुजफ्फरी, शाही, देसी, बेदाना, रोज सेंटेड और लाल बंबे जैसी कई प्रसिद्ध किस्में शामिल हैं।
कहा जाता है कि यहीं से कई उन्नत प्रजातियों का विकास हुआ है, जिसने बिहार की लीची को देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक पहचान दिलाई है। जिस कारण यह स्थान लीची अनुसंधान और खेती के क्षेत्र में किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सही देखभाल और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर किसान लीची की खेती से बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। शायद यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में किसान और शोधकर्ता यहां जानकारी लेने पहुंचते हैं।

