“सुरीले परिवार” का चतुर्थ वार्षिकोत्सव सम्पन्न, संगीत-संस्कृति का दिखा भव्य संगम
पटना (बिहार) :बीसंगीत, संस्कृति और कला के समन्वय का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए “सुरीले परिवार” का चतुर्थ वार्षिकोत्सव समारोह अत्यंत भव्य एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रणव कुमार (आईएएस), विशिष्ट अतिथि अवनीश कुमार तथा आदरणीया श्रीमती इंदु प्रसाद की उपस्थिति में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके बाद मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर आयोजन की विधिवत शुरुआत की गई।
समारोह में सुरीले परिवार के मुख्य संरक्षक रंजन कुमार श्रीवास्तव, पुष्पलता श्रीवास्तव, मुख्य संचालक प्रमोद कुमार सिन्हा, सह संचालिका नीलम रानी एवं सह संचालक राजन कुमार सिन्हा सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत शॉल, पुष्पगुच्छ एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर किया गया, जिससे आयोजन का वातावरण और भी गरिमामय हो उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. नंदन कुमार सिन्हा द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से हुई, जिसने पूरे माहौल को आध्यात्मिक और सुरमय बना दिया। इसके बाद आशी कंठ ने अपने मनोहारी स्वागत नृत्य से दर्शकों का मन मोह लिया। सांगीतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला में नीलम रानी ने “सत्यम शिवम सुंदरम” की प्रस्तुति दी, वहीं प्रमोद कुमार सिन्हा ने “मेरा जूता है जापानी” गीत गाकर खूब तालियां बटोरीं। समूह गीतों एवं अन्य प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागी कलाकारों को “सुरमयी प्रतिभा सम्मान” से सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि प्रणव कुमार ने महाकवि भर्तृहरि के श्लोक का उल्लेख करते हुए संगीत और कला के महत्व को रेखांकित किया तथा कलाकारों के लिए संचालित सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। वहीं विशिष्ट अतिथि अवनीश कुमार ने संगीत को जीवन का अभिन्न अंग बताते हुए इसे सकारात्मक ऊर्जा और उपचार का माध्यम बताया।
समारोह में कई कलाकारों ने एकल एवं युगल प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। मंच संचालन डॉ. नंदन कुमार सिन्हा ने अशोक कुमार के सहयोग से सफलतापूर्वक किया। कार्यक्रम का समापन रंजन कुमार श्रीवास्तव के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह आयोजन संगीत, संस्कृति और सामूहिक प्रतिभा का एक शानदार उत्सव बनकर उपस्थित जनों के मन में अपनी अमिट छाप छोड़ गया।
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