तपिश में मजदूर
सच्चे मन की यह आवाज है, जिसे शब्दों में बयां करने का प्रयास किया है। इन कर्मवीरों कर्मठ लोगों के अथक परिश्रम से ही भारत का विकास होता आया है। कदम दर कदम हमें इनके ही सहयोगी की जरूरत है। असीम गहराइयों से इनके सुखद भविष्य की मंगलमय कामना है। : किरण बरेली
मजदूर दिवस
कर्मवीरों ने दिवस बिताएं
सूरज की तीखी तपिश में
कभी तो इन्हें शीतल चांदनी की
बरसात मिलना चाहिए।
मेहनत की कठिन राहों में
जिस्म से खारा जल खूब बहाया
पावन गंगा इनके भी द्वार
तक पहुंचना चाहिए।।
धूप/ध़प गली में
सफर चलता रहा है ताउम्र
छांव नगर में इक मुकाम
इनके भी नाम रहना चाहिए।।
रोटी की खातिर छोड़ आए
घर/गांव ये मेहनतकश वीर
इनके त्याग व सम्मान को
मन से नमन करना चाहिए।।
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