गाज़ियाबाद में विशेष शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू, दिव्यांगता की शीघ्र पहचान पर जोर
गाज़ियाबाद (बिहार): इंस्टीट्यूट ऑफ रिहैबिलिटेशन, राम नगर कॉलोनी, भट्ठा रोड स्थित अटोर गांव (राज नगर एक्सटेंशन के निकट) में 9 अप्रैल 2026 से तीन दिवसीय विशेष शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI), भारत सरकार के अनुमोदन के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में एनसीआर दिल्ली, उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा के विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी विद्यालयों में कार्यरत विशेष शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी देखी जा रही है, जिससे कार्यक्रम का दायरा और प्रभाव दोनों व्यापक हो गया है।
कार्यक्रम का मुख्य विषय “विकलांगता की शीघ्र पहचान एवं शीघ्र हस्तक्षेप” रखा गया है, जो वर्तमान समय में समावेशी शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चों में दिव्यांगता की पहचान प्रारंभिक अवस्था में हो जाए, तो समय रहते उचित हस्तक्षेप कर उनके शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास को बेहतर दिशा दी जा सकती है।
कार्यक्रम का उद्घाटन वरिष्ठ पत्रकार संजय शाह (इंडिया टीवी, नोएडा) द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर संस्था की निदेशक मंजू गुप्ता ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि समाज में दिव्यांगता के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को न केवल तकनीकी रूप से सक्षम बनाते हैं, बल्कि उन्हें संवेदनशील दृष्टिकोण भी प्रदान करते हैं, जो दिव्यांग बच्चों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।
मुख्य अतिथि संजय शाह ने अपने संबोधन में कहा कि मीडिया समाज के हर वर्ग तक सूचना पहुंचाने का सशक्त माध्यम है और दिव्यांगता की शीघ्र पहचान एवं उसके प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में मीडिया की भागीदारी निर्णायक भूमिका निभा सकती है। उन्होंने इस दिशा में निरंतर सहयोग का भरोसा भी दिलाया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विशेषज्ञ जैसे डॉ. रावली माथुर, डॉ. विवेक झा, डॉ. वी. पी. साह, डॉ. गौरव तोमर, डॉ. आशुतोष कुमार सिंह, डॉ. सिद्धार्थ उपाध्याय, डॉ. सुमित भटेजा, श्री अमरकोश महेंद्रू एवं डॉ. तानिया सोलंकी द्वारा विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए जाएंगे। इन व्याख्यानों में दिव्यांगता की पहचान, व्यवहारिक समस्याओं का समाधान, शिक्षण तकनीक एवं समावेशी शिक्षा के आधुनिक तरीकों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम की एक विशेषता यह भी है कि संस्था के व्याख्याता श्रीमति बबीता शर्मा, कुमारी तान्या एवं श्री आशुतोष गौर द्वारा दिव्यांग बच्चों के साथ हस्तक्षेप की लाइव प्रस्तुति दी जाएगी, जिससे प्रतिभागियों को व्यवहारिक प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा। यह सत्र शिक्षकों को वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करने की समझ विकसित करने में सहायक होगा।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) द्वारा मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे, जो उनके पेशेवर विकास में सहायक सिद्ध होगा। अंत में निदेशक मंजू गुप्ता ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, प्रतिभागियों एवं संस्था के कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में भी निरंतर आयोजित किए जाएंगे।
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